कानपुर कचहरी में युवा वकील की दर्दनाक मौत: ‘मैं हार गया पापा, आप जीत गए’

‘मैं हार गया पापा, आप जीत गए’
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Tanya Bajaj

Tanya Bajaj

0 सेकंड पहले

Hamara media aisa hi hona chahiye, sach aur saaf.

Payal jadon

Payal jadon

0 सेकंड पहले

Sach dikhane ka shukriya, aisi journalism chahiye.

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उत्तर प्रदेश के कानपुर जिला कोर्ट परिसर से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां 23 वर्षीय युवा अधिवक्ता प्रियांशु श्रीवास्तव ने कोर्ट की पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद पूरे कचहरी परिसर में अफरा-तफरी मच गई। साथी वकील, न्यायिक अधिकारी और पुलिस मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

 

दो पन्नों का सुसाइड नोट बना जांच का सबसे बड़ा आधार
मौत से पहले प्रियांशु ने व्हाट्सएप स्टेटस और सोशल मीडिया पर दो पन्नों का सुसाइड नोट पोस्ट किया, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। नोट में उन्होंने अपने पिता पर वर्षों से मानसिक प्रताड़ना, अपमान और कठोर व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने लिखा, “मैं हार गया पापा, आप जीत गए… मेरी लाश को हाथ मत लगाना।” यह लाइन अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

 

बचपन की कड़वी यादें और अपमान का दर्द
प्रियांशु ने अपने नोट में बचपन की कई घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि मात्र 6 साल की उम्र में फ्रिज से आम का जूस पीने पर पिता ने उन्हें निर्वस्त्र कर घर से बाहर निकाल दिया था। इसके बाद कम नंबर आने पर भी इसी तरह की धमकियां मिलती थीं। नोट में यह भी आरोप लगाया गया कि उन्हें मोहल्ले और घर के सामने अपशब्द कहकर बेइज्जत किया जाता था। इन घटनाओं ने उनके मन पर गहरा असर छोड़ा।

 

करियर की घुटन और पहचान खोने का दर्द
प्रियांशु खुद भी वकील थे और अपने पिता के साथ ही कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे थे। लेकिन उन्होंने नोट में लिखा कि उनका अपना कोई स्वतंत्र चैंबर नहीं था और वे सिर्फ पिता के काम में लगे रहते थे। उन्हें लगता था कि उनकी खुद की कोई पहचान नहीं है। एक युवा प्रोफेशनल के लिए यह भावनात्मक दबाव बेहद भारी साबित हुआ।

 

घटना से पहले फोन पर बात, फिर लगा दी छलांग
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना वाले दिन प्रियांशु पांचवीं मंजिल पर पहुंचे और लगभग 10 से 15 मिनट तक फोन पर किसी से बात करते रहे। इसके बाद उन्होंने अचानक छलांग लगा दी। पूरी घटना कोर्ट परिसर के CCTV कैमरों में कैद हुई है। पुलिस अब कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल सबूत और सुसाइड नोट की जांच कर रही है।

 

क्या अनुशासन और कठोरता की भी एक सीमा होनी चाहिए?
यह मामला सिर्फ आत्महत्या नहीं, बल्कि पारिवारिक दबाव, मानसिक स्वास्थ्य और बच्चों पर अत्यधिक सख्ती जैसे गंभीर मुद्दों को सामने लाता है। क्या अनुशासन के नाम पर बच्चों की भावनाओं को कुचल देना सही है? क्या माता-पिता को समय रहते बच्चों की मानसिक स्थिति समझनी चाहिए? यह सवाल अब समाज के सामने खड़े हैं।

 

पुलिस जांच जारी, परिवार सदमे में
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच जारी है। पिता की ओर से अभी तक कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है। परिवार गहरे सदमे में है, जबकि कानपुर कचहरी में यह घटना हर किसी के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

प्रियांशु श्रीवास्तव की मौत सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है। मानसिक प्रताड़ना, अपमान और दबाव कभी-कभी अंदर ही अंदर इंसान को तोड़ देते हैं। संवाद, संवेदना और समझदारी ही ऐसे हादसों को रोक सकती है।

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Tanya Bajaj

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0 सेकंड पहले

Hamara media aisa hi hona chahiye, sach aur saaf.

Payal jadon

Payal jadon

0 सेकंड पहले

Sach dikhane ka shukriya, aisi journalism chahiye.

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