Stock Market Fall:एशियाई बाजारों में हाहाकार: विदेशी बाजारों में कोहराम का असर भारतीय शेयर बाजार पर

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मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार ने एक बार फिर कमजोर शुरुआत की। विदेशी बाजारों में जारी भारी गिरावट और एशियाई बाजारों में मचे कोहराम का सीधा असर घरेलू बाजार पर देखने को मिला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी, दोनों ही इंडेक्स खुलते ही तेज गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए।
सोमवार के बाद मंगलवार को भी वैश्विक बाजारों में निवेशकों के बीच घबराहट बनी हुई है। खासतौर पर एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली देखी जा रही है, जिससे भारतीय शेयर बाजार की धारणा भी कमजोर हो गई है।
एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में मंगलवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। जापान का निक्केई इंडेक्स, साउथ कोरिया का कोस्पी और हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स करीब 2 फीसदी तक फिसल गए। इन बाजारों में आई गिरावट ने पूरे एशियाई क्षेत्र में नकारात्मक माहौल बना दिया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, विदेशी निवेशकों की सतर्कता और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के चलते एशियाई बाजारों में लगातार दबाव बना हुआ है। इसका असर उभरते बाजारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
इसी नकारात्मक ग्लोबल संकेत के चलते भारतीय शेयर बाजार भी दबाव में आ गया। बाजार खुलते ही सेंसेक्स 300 अंक से ज्यादा फिसल गया, जबकि निफ्टी भी बड़ी गिरावट के साथ नीचे खुला। शुरुआती कारोबार में ही लगभग सभी सेक्टर्स पर बिकवाली का दबाव साफ नजर आया।
बाजार की हालत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि BSE लार्जकैप इंडेक्स में शामिल 30 में से 27 शेयर रेड जोन में खुले। केवल कुछ चुनिंदा शेयर ही हरे निशान में टिक पाए, जबकि अधिकांश दिग्गज कंपनियों के शेयरों पर बिकवाली हावी रही।
बड़े शेयरों में आई गिरावट ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है, क्योंकि लार्जकैप शेयरों को आमतौर पर बाजार की स्थिरता का संकेत माना जाता है।
विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, विदेशी बाजारों में गिरावट और निवेशकों की सतर्कता के कारण फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय संकेतों और संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी।जानकारों के अनुसार, आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक ग्लोबल मार्केट ट्रेंड, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी। यदि एशियाई और अन्य विदेशी बाजारों में दबाव बना रहता है, तो भारतीय शेयर बाजार पर भी इसका असर जारी रह सकता है।
हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए विशेषज्ञ सतर्क रणनीति अपनाने और बाजार की चाल पर नजर बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं।









