ईरान-अमेरिका सीजफायर के बाद भारत की बड़ी पहल: होर्मुज में फंसे 16 जहाजों को निकालने की कवायद तेज

होर्मुज में फंसे 16 जहाजों को निकालने की कवायद तेज

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पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच घोषित सीजफायर के तुरंत बाद भारत ने सक्रिय कूटनीतिक कदम उठाए हैं। भारत सरकार ने ईरान से संपर्क साधकर होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में फंसे अपने तेल और गैस के जहाजों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

होर्मुज में फंसे जहाज, ऊर्जा आपूर्ति पर संकट

इस समय भारत के करीब 16 जहाज इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिनमें दो लाख टन से अधिक एलपीजी (LPG) मौजूद है। यह आपूर्ति भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है, वहां अस्थिरता ने भारत सहित कई देशों की चिंता बढ़ा दी थी।

भारत ने किया सीजफायर का स्वागत

विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए सीजफायर का स्वागत किया है। बयान में कहा गया कि यह कदम पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। भारत ने स्पष्ट किया कि संवाद और कूटनीति ही किसी भी संघर्ष का स्थायी समाधान हैं।

 

 

ऊर्जा सुरक्षा पर राहत की उम्मीद

भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85% आयात करता है, जिसमें से करीब 60% पश्चिम एशिया से आता है। ऐसे में इस क्षेत्र में तनाव का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है। सीजफायर के बाद उम्मीद है कि तेल और गैस की आपूर्ति फिर से सामान्य हो सकेगी।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा व्यापक असर

ईरान-अमेरिका संघर्ष का असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ा। तेल की कीमतों में उछाल से ट्रांसपोर्ट, उत्पादन और खाद्य पदार्थों की लागत बढ़ गई। पेट्रोल-डीजल महंगे होने से आम जनता की जेब पर सीधा असर पड़ा है।

सप्लाई चेन पर संकट, व्यापार प्रभावित

होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट के कारण वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई। कई जहाज रास्ते में फंस गए, जिससे जरूरी वस्तुओं की कमी और कीमतों में वृद्धि देखी गई। भारत से बासमती चावल की खेप, उर्वरक और अन्य आवश्यक सामान भी प्रभावित हुए हैं।

महंगाई और परिवहन पर असर

तेल महंगा होने के कारण हवाई ईंधन और शिपिंग लागत बढ़ी, जिससे फ्लाइट टिकट महंगे हुए और सामान ढुलाई की लागत बढ़ गई। इसका असर सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचा है।

कूटनीतिक मोर्चे पर सक्रिय भारत

भारत ने इस संकट के बीच कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज कर दी हैं। विदेश सचिव विक्रम मिसरी अमेरिका दौरे पर हैं, जहां वे पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा करेंगे। वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की यात्रा पर जाएंगे।

आगे की राह: स्थिरता और रणनीति

सीजफायर के बाद व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सामान्य होने और वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है। भारत की रणनीति साफ है—ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक व्यापार संतुलन को बनाए रखना। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह सीजफायर स्थायी शांति में बदल पाता है या नहीं।

 

 

 

 

 

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