ईरान जंग का भारत पर बड़ा असर: रिकॉर्ड कीमत पर 25 लाख टन यूरिया खरीदेगा भारत

Payal jadon
6 घंटे पहलेHamara media aisa hi hona chahiye, sach aur saaf.
Harsh Pandya
6 घंटे पहलेAcchi khabar! Positive news bhi aati rehni chahiye.
Reyansh Joshi
6 घंटे पहलेIska aage kya hoga? Koi update milega kya?
Sai Mehta
6 घंटे पहलेYeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!
Aryan Malhotra
14 घंटे पहलेAam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अब केवल तेल और गैस बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा असर भारत की कृषि व्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। भारत, जो दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया आयातक देश माना जाता है, अब रिकॉर्ड 25 लाख मीट्रिक टन यूरिया खरीदने जा रहा है। खास बात यह है कि इस बार भारत को दो महीने पहले की तुलना में लगभग दोगुनी कीमत चुकानी पड़ रही है। इससे देश की खाद व्यवस्था, सरकारी खर्च और भविष्य की कृषि लागत पर बड़ा असर पड़ सकता है।
रिकॉर्ड 25 लाख टन यूरिया खरीदेगा भारत
सरकारी सूत्रों के अनुसार इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) ने एक बड़े टेंडर के तहत 25 लाख टन यूरिया खरीदने का फैसला किया है। इसमें 15 लाख टन यूरिया पश्चिमी तट पर डिलीवरी के लिए 935 डॉलर प्रति टन की दर से खरीदा जाएगा, जबकि 10 लाख टन यूरिया पूर्वी तट के लिए 959 डॉलर प्रति टन के हिसाब से लिया जाएगा। यह भारत के इतिहास के सबसे बड़े एकमुश्त यूरिया आयात सौदों में से एक माना जा रहा है।
दो महीने में कीमत लगभग दोगुनी
अगर पिछली खरीदारी से तुलना करें तो यह वृद्धि चौंकाने वाली है। दो महीने पहले राष्ट्रीय रासायनिक और उर्वरक निगम (RCF) के टेंडर में पश्चिमी तट के लिए करीब 508 डॉलर और पूर्वी तट के लिए 512 डॉलर प्रति टन की दर से यूरिया खरीदा गया था। अब यही कीमत 935 से 959 डॉलर प्रति टन पहुंच चुकी है। यानी बहुत कम समय में यूरिया कीमत लगभग दोगुनी हो गई है।
ग्लोबल सप्लाई चेन पर युद्ध का असर
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण समुद्री व्यापार मार्ग, शिपिंग लागत और सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इससे फर्टिलाइजर की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धता कम हो गई है। रॉयटर्स रिपोर्ट के अनुसार इस टेंडर में 56 लाख टन यूरिया की सप्लाई ऑफर आई थी, लेकिन ज्यादातर बोली 1000 डॉलर प्रति टन या उससे अधिक थी। कुछ सप्लायर्स ने 1136 डॉलर प्रति टन तक की बोली लगाई।
भारत की बड़ी खरीद से दुनिया पर असर
भारत की यह बड़ी खरीद वैश्विक बाजार में यूरिया की उपलब्धता और घटा सकती है। कई सप्लायर्स पहले ही भारत को शिपमेंट देने का वादा कर चुके हैं, जिससे दूसरे देशों को यूरिया मिलने में परेशानी हो सकती है। इससे आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय कीमतें और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
सरकार पर बढ़ेगा सब्सिडी बोझ
भारत सरकार किसानों को सस्ती दरों पर खाद उपलब्ध कराती है और इसके लिए उर्वरक कंपनियों को भारी सब्सिडी देती है। अब जब आयात लागत तेजी से बढ़ रही है, तो सरकार पर सब्सिडी का अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है। इससे वित्तीय दबाव बढ़ सकता है और आने वाले बजट पर असर दिखाई दे सकता है।
किसानों पर क्या होगा असर?
फिलहाल सरकार किसानों को सस्ती यूरिया उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लगातार ऊंची रहीं तो भविष्य में खाद की उपलब्धता और वितरण चुनौती बन सकता है। खेती की लागत बढ़ने से किसानों की चिंता भी बढ़ सकती है।
आने वाले समय में क्या संकेत?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि मिडिल ईस्ट तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ तो भारत को आगे भी महंगे दामों पर खाद आयात करनी पड़ सकती है। इससे कृषि क्षेत्र, खाद्य उत्पादन और सरकारी खजाने पर दबाव बना रहेगा।







