40 दिन की अमेरिका-इजरायल-ईरान जंग थमी: 3640 मौतें, 90 हजार घर तबाह

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28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल ठिकानों और सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, साथ ही मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया। धीरे-धीरे यह संघर्ष लेबनान, इराक, जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, यूएई और ओमान तक फैल गया, जिससे पूरा पश्चिम एशिया युद्ध क्षेत्र में बदल गया।
3640 मौतें, हजारों घायल—मानवीय संकट गहराया
इस 40 दिन की जंग में अब तक कुल 3640 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
ईरान: 2076 मौतें, 26,500 से अधिक घायल,
लेबनान: 1497 मौतें,
इजरायल: 26 मौतें, 7183 घायल,
अमेरिका: 13 सैनिक मारे गए, 200+ घायल,
खाड़ी देशों में: 28 मौतें,
इराक: 109 मौतें,
सीरिया: 4 मौतें,
जॉर्डन: 29 घायल,
विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक आंकड़े इससे अधिक हो सकते हैं क्योंकि कई क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य अब भी जारी हैं।
ईरान में सबसे ज्यादा तबाही: घर, स्कूल, अस्पताल खंडहर बने
ईरान इस युद्ध का सबसे बड़ा शिकार बना। IRNA और ईरानी रेड क्रिसेंट के अनुसार: 90,000 से अधिक रिहायशी घर क्षतिग्रस्त, 22,000 से ज्यादा व्यावसायिक संपत्तियां नष्ट, कुल 113,570 नागरिक संरचनाएं प्रभावित, 760 स्कूल नष्ट या क्षतिग्रस्त, 230 से अधिक छात्रों की मौत, 307 अस्पताल, मेडिकल और आपातकालीन केंद्र गंभीर रूप से प्रभावित,
तेहरान में अकेले 44,000 से अधिक इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं,
खाड़ी देशों में ऊर्जा संकट, तेल-गैस सप्लाई प्रभावित, ईरानी पलटवार में खाड़ी देशों के तेल संयंत्र, बंदरगाह और एयरपोर्ट भी निशाने पर रहे। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बाधित होने से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गईं।
यूएई, सऊदी अरब, बहरीन और कतर जैसे देशों की एयर डिफेंस ने कई मिसाइलें रोकीं, लेकिन ऊर्जा ढांचे को भारी नुकसान हुआ।
आर्थिक नुकसान: दुनिया की GDP को 54.88 लाख करोड़ रुपये का झटका
अनुमान है कि इस युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था को अब तक लगभग 54.88 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
अमेरिका: करीब 7.49 लाख करोड़ रुपये का नुकसान,
इजरायल: लगभग 15 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष युद्ध खर्च,
ईरान: GDP में 10% तक गिरावट की आशंका,
शेयर बाजारों में गिरावट और ईंधन संकट ने एशिया व यूरोप तक असर डाला है।
किसे क्या हासिल हुआ? जीत-हार का सवाल अब भी बाकी
इजरायल का दावा था कि उसका उद्देश्य ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता खत्म करना था, जबकि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना चाहता था।
हालांकि 40 दिन बाद तस्वीर साफ नहीं है— ईरान ने भारी नुकसान के बावजूद सैन्य क्षमता बरकरार रखी, इजरायल का एयर डिफेंस कई बार विफल दिखा, अमेरिका की क्षेत्रीय सुरक्षा गारंटी कमजोर पड़ी, खाड़ी देश बेबस नजर आए,
विश्लेषकों के मुताबिक, रणनीतिक रूप से ईरान इस संघर्ष में सबसे मजबूत प्रतिरोधी शक्ति बनकर उभरा है।
8 अप्रैल को युद्धविराम, लेकिन तनाव अभी खत्म नहीं
8 अप्रैल (भारतीय समयानुसार) अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने की शर्त भी शामिल है। हालांकि लेबनान मोर्चे पर इजरायल ने स्पष्ट किया है कि उसकी कार्रवाई सीजफायर से अलग रहेगी। पाकिस्तान में शांति वार्ता प्रस्तावित है, लेकिन क्षेत्र की स्थिति अब भी बेहद नाजुक बनी हुई है।
यह युद्ध दिखाता है कि एक सीमित सैन्य कार्रवाई कैसे पूरे क्षेत्रीय संकट में बदल सकती है। 3640 मौतें, 90 हजार घरों की तबाही, 760 स्कूलों और 307 अस्पतालों का विनाश आने वाली पीढ़ियों पर गहरा असर डालेगा। पश्चिम एशिया अब एक नए शक्ति संतुलन के दौर में प्रवेश कर चुका है।







