भगवान के द्वार पर ‘भेदभाव’ का पहरा: ‘देवता आने’ का नाटक कर रोका रास्ता

2 मार्च 2026646
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‘देवता आने’ का नाटक कर रोका रास्ता

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कर्नाटक के तुमकुरु जिले से सामने आई दो घटनाओं ने एक बार फिर सामाजिक समरसता और संविधानिक मूल्यों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नवविवाहित दलित दंपति को मंदिर में प्रवेश से रोकने और एक दलित महिला के साथ कथित मारपीट की घटनाओं ने पूरे राज्य में बहस छेड़ दी है।

पहली घटना: अरसम्मा देवी मंदिर, गोनी गांव
Tumakuru district के तुरुवेकेरे तालुक के गोनी गांव में 19 फरवरी को एक नवविवाहित दलित दंपति को Arasamma Devi Temple में प्रवेश करने से रोक दिया गया।

‘ऊपरी हवा’ का नाटक, मंदिर के रास्ते में बैठा आरोपी
आरोप है कि 58 वर्षीय किसान नारायणप्पा ने कथित तौर पर खुद पर ‘देवता का साया’ आने का नाटक किया और मंदिर के प्रवेश मार्ग में घुटनों के बल बैठकर दंपति को अंदर जाने से रोक दिया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में वह दंपति पर चिल्लाते हुए उन्हें मंदिर छोड़ने के लिए कहता दिख रहा है।
पीड़ित जगदीश ने तुरुवेकेरे पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने नारायणप्पा समेत अन्य आरोपियों — प्रभा, कांतन्ना, अमूल्या, पुट्टेगौड़ा और पद्मा — के खिलाफ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।

आरोपी गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजा गया
पुलिस ने मुख्य आरोपी नारायणप्पा को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

प्रशासन की पहल: शांति बैठक और पुलिस सुरक्षा में पूजा
घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बन गया था। 24 फरवरी को जिला प्रशासन ने शांति बैठक आयोजित की। बैठक के बाद पुलिस अधीक्षक केवी अशोक और तुरुवेकेरे तहसीलदार एमएन कुंजी अहमद ने स्वयं दंपति को मंदिर तक पहुंचाया और पुलिस तैनाती के बीच उन्हें पूजा करवाई। “सरकारी मंदिर सबके लिए खुला है”
तहसीलदार ने स्पष्ट कहा कि अरसम्मा देवी मंदिर मुजराई विभाग के अंतर्गत आता है और यह एक सार्वजनिक स्थल है, जहां बिना किसी भेदभाव के सभी भक्तों को प्रवेश का अधिकार है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी घटना दोहराई गई तो सख्त कार्रवाई होगी।

दूसरी घटना: दलित महिला के साथ मारपीट
23 फरवरी को तुमकुरु जिले में ही एक और चौंकाने वाली घटना सामने आई। Bengaluru के मगदी रोड स्थित आंद्राहाल्ली की रहने वाली रोजा मरम्मा देवी उत्सव में भाग लेने अपने पैतृक गांव थिगलरपल्या (येदियूर होबली) आई थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि Venkataramana Mudalagiri Temple में प्रवेश के दौरान पुजारी हनुमय्या और अन्य लोगों ने उनकी जाति का हवाला देते हुए उन्हें गालियां दीं, बाल पकड़कर पीटा और मंदिर से बाहर धकेल दिया।
अमृतुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज होने के बाद पुजारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले की जांच जारी है।

राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ
संयोगवश, दोनों घटनाएं कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर के निर्वाचन क्षेत्र में हुईं। यह सवाल उठ रहा है कि जब संविधान सभी को समान अधिकार देता है, तब भी धार्मिक स्थलों पर जातिगत भेदभाव क्यों जारी है?

सोशल मीडिया पर गूंज
घटना का वीडियो वायरल होने के बाद #CasteDiscrimination और #TempleEntry जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कई सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

बड़ा सवाल
क्या 2026 के भारत में भी दलित समुदाय को अपने ही गांव के मंदिर में प्रवेश के लिए संघर्ष करना पड़ेगा?
क्या ‘देवता का आवेश’ दिखाकर किसी को संविधानिक अधिकारों से वंचित किया जा सकता है?

प्रशासन का दावा
अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल गांव में स्थिति नियंत्रण में है और सभी समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।

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