सांवलिया सेठ की अपार कृपा: सोना-चांदी का भी रिकॉर्ड

सोना-चांदी का भी रिकॉर्ड

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राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री सांवलिया सेठ मंदिर में इस बार आस्था ने इतिहास रच दिया। दीपावली के बाद खुले मंदिर भंडार से पहली बार 51 करोड़ 27 लाख 30 हजार 112 रुपये का चढ़ावा प्राप्त हुआ है। यह राशि मंदिर के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी चढ़ावा रकम है।

6 चरणों में पूरी हुई भंडार की गणना
19 नवंबर को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मंदिर भंडार खोला गया। प्रशासन, मंदिर मंडल, ट्रस्ट और पुलिस की मौजूदगी में 6 चरणों (राउंड) में गणना की गई, जो गुरुवार को पूरी हुई। जैसे-जैसे आंकड़े सामने आते गए, पूरे मेवाड़ में चर्चा एक ही रही—इस बार तो सांवलिया सेठ ने कमाल कर दिया।

नकद दान ने पार किया 51 करोड़ का आंकड़ा
दानपात्र, भेंट कक्ष और ऑनलाइन माध्यमों से प्राप्त कुल राशि ने पहली बार 51 करोड़ का आंकड़ा पार किया। अकेले दानपात्र से 40 करोड़ 74 लाख 40 हजार 593 रुपये प्राप्त हुए, जबकि ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और भेंट कक्ष से 10 करोड़ 52 लाख 89 हजार 569 रुपये मिले।

ऑनलाइन दान में भी बना नया कीर्तिमान
इस बार श्रद्धालुओं ने डिजिटल माध्यम से भी जमकर दान किया। 10.52 करोड़ रुपये से अधिक का ऑनलाइन चढ़ावा मंदिर के इतिहास का सबसे बड़ा ऑनलाइन दान रिकॉर्ड बन गया।

सोना-चांदी की बंपर प्राप्ति, भंडार कक्ष दमका
नकद राशि के साथ-साथ सोना और चांदी की भी रिकॉर्ड प्राप्ति हुई।
सोना: कुल 1 किलो 204 ग्राम 400 मिलीग्राम,
चांदी: कुल 207 किलो 793 ग्राम,
दानपात्र और भेंट कक्ष दोनों से प्राप्त इन कीमती धातुओं ने भंडार कक्ष को चमका दिया।

पिछले वर्ष का रिकॉर्ड भी टूटा
गौरतलब है कि वर्ष 2024 में दीपावली बाद खुले भंडार से 34 करोड़ 91 लाख 95 हजार रुपये मिले थे, जो उस समय रिकॉर्ड था। लेकिन इस वर्ष श्रद्धालुओं की आस्था ने उस रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया।

आखिर क्यों इस बार इतना ज्यादा चढ़ावा आया?
मंदिर मंडल अध्यक्ष हजारी दास वैष्णव के अनुसार, दीपावली के चलते दो माह तक भंडार नहीं खोला गया था। इस अवधि में लाखों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर दान किया। भक्तों की मान्यता है कि सांवलिया सेठ के दरबार में दिया गया दान कई गुना होकर लौटता है, इसी विश्वास ने इस ऐतिहासिक चढ़ावे को जन्म दिया।