धार के गुजरी गांव में तेंदुए का आतंक: महिला समेत 4 घायल
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मध्य प्रदेश के धार जिले के धामनोद वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम गुजरी डेहरिया में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक खतरनाक तेंदुआ अचानक बस्ती क्षेत्र में घुस आया। सुबह-सुबह हुए इस हमले से पूरे गांव में डर और भगदड़ जैसे हालात बन गए। ग्रामीणों ने जान बचाने के लिए इधर-उधर भागना शुरू कर दिया। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है और लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हो गए हैं।
महिला समेत चार लोग घायल
जानकारी के अनुसार तेंदुए ने सबसे पहले घर के बाहर काम कर रही कांताबाई राठौड़ पर हमला किया। महिला की चीख सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तेंदुआ उन पर भी टूट पड़ा। महेश वास्केल सहित कुल चार लोग घायल हो गए, जिनमें एक महिला भी शामिल है। सभी घायलों को पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गुजरी ले जाया गया, जहां से उन्हें जिला अस्पताल धार रेफर किया गया। डॉक्टरों के अनुसार सभी घायल फिलहाल खतरे से बाहर हैं।
युवक ने दिखाई बहादुरी, तेंदुए से भिड़ गया
घटना का एक चौंकाने वाला वीडियो भी सामने आया है, जिसमें गांव का एक युवक ग्यारसी सोलंकी बहादुरी दिखाते हुए तेंदुए को पकड़ने की कोशिश करता नजर आ रहा है। कुछ सेकंड तक युवक और तेंदुए के बीच संघर्ष चलता रहा, लेकिन अगले ही पल तेंदुए ने उसका हाथ दबोच लिया और खुद को छुड़ाकर नाले की ओर भाग निकला। यह दृश्य देखकर गांव के लोग सन्न रह गए।
10 घंटे तक नाले में छिपा रहा Leopard
हमले के बाद तेंदुआ गांव के पास बने नाले में जा छिपा और करीब 10 घंटे तक वहीं डटा रहा। बताया जा रहा है कि नाले में पानी और ठंडक होने के कारण वह बार-बार वहीं शरण ले रहा था। दिनभर लोग उसे भगाने की कोशिश करते रहे, लेकिन वह बीच-बीच में बाहर निकलकर हमला करने की कोशिश करता रहा।
वनकर्मी पर भी किया हमला
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान तेंदुए ने वन विभाग के कर्मचारी विकास डावर पर भी झपट्टा मार दिया और उनके पैर को जकड़ लिया। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने लाठी-डंडों और वाहन के टायर फेंककर तेंदुए को दूर भगाया, जिससे वनकर्मी की जान बच सकी। इस घटना ने पूरे ऑपरेशन की गंभीरता को और बढ़ा दिया।
इंदौर और खरगोन से बुलाई गई विशेष टीमें
घटना के बाद वन विभाग और पुलिस तुरंत सक्रिय हो गए। करीब 30 वनकर्मी और 20 पुलिस जवानों की तैनाती की गई। तेंदुए को पकड़ने के लिए इंदौर और खरगोन से विशेष रेस्क्यू टीमें भी बुलाई गईं। जेसीबी मशीनों से नाले के रास्ते बंद किए गए और पिंजरे लगाए गए, लेकिन देर शाम तक तेंदुआ पकड़ में नहीं आया।
गांव में डर का माहौल, लोग घरों में कैद
घटना के बाद पूरा गांव घरों में कैद हो गया है। बच्चों को बाहर निकलने से रोका जा रहा है और ग्रामीणों के मन में लगातार भय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि अगर तेंदुआ जल्द नहीं पकड़ा गया तो रात में खतरा और बढ़ सकता है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और घरों से बाहर न निकलने की अपील की है।
इंसान और वन्यजीव संघर्ष पर बड़ा सवाल
यह घटना एक बार फिर जंगलों के आसपास बसे इलाकों में बढ़ते इंसान और वन्यजीव संघर्ष की तरफ इशारा करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों का क्षेत्र घटने और आबादी बढ़ने के कारण ऐसे हादसे लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में वन विभाग को दीर्घकालिक योजना बनाकर सुरक्षा उपाय करने की जरूरत है।

