एमपी के राजगढ़ में इंसानियत शर्मसार: जंगल में बकरी चराने गई मासूम से सामूहिक दुष्कर्म

जंगल में बकरी चराने गई मासूम से सामूहिक दुष्कर्म
Sadaiv Satya
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मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली और इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। जिले के पचोर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली उदनखेड़ी पुलिस चौकी के एक गांव में 10 वर्ष की एक मासूम बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) की वारदात को अंजाम दिया गया है। सबसे हैरान और विचलित करने वाली बात यह है कि इस घिनौने अपराध को अंजाम देने वाले तीनों आरोपी भी नाबालिग (किशोर) हैं।

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक घटना 19 जून की बताई जा रही है। पीड़ित बच्ची (जो तीसरी कक्षा की छात्रा है) हमेशा की तरह अपने घर के पास स्थित जंगल में बकरियां चराने के लिए गई थी। दोपहर के वक्त जब वह जंगल में अकेली थी, तभी उसके पड़ोस में रहने वाला एक 12 वर्षीय लड़का भी अपनी बकरियां चराने वहां पहुंच गया। दोनों बच्चे वहां मौजूद थे, तभी कुछ ही देर बाद खजूर खाने के बहाने 14 और 15 साल के दो अन्य नाबालिग किशोर भी वहां आ धमके। सूने जंगल और बच्ची को अकेला पाकर तीनों लड़कों की नीयत बिगड़ गई और उन्होंने मासूम के साथ दरिंदगी शुरू कर दी।

 

डरी-सहमी बच्ची ने घर लौटकर सुनाई आपबीती
इस खौफनाक और दिल दहला देने वाले कृत्य के बाद आरोपी मासूम को वहीं छोड़कर भाग गए। गंभीर रूप से घायल और डरी-सहमी पीड़ित बच्ची किसी तरह रोते-बिलखते हुए अपने घर पहुंची। घर पहुंचकर उसने अपनी हिम्मत जुटाई और अपनी भाभी को पूरी आपबीती सुनाई। मासूम के साथ हुई इस दरिंदगी को सुनकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
बिना समय गंवाए, पीड़िता की भाभी तुरंत उसे लेकर पचोर थाने पहुंचीं और नामजद आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। मामले की संवेदनशीलता और पीड़िता की गंभीर स्थिति को देखते हुए पचोर थाना पुलिस तुरंत हरकत में आई। पुलिस ने तत्काल पीड़ित बच्ची को मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल भेजा, जहां डॉक्टरों की टीम ने अपनी रिपोर्ट में मासूम के साथ हुए दुष्कर्म की पुष्टि की।

 

पुलिस की त्वरित कार्रवाई, पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज
मेडिकल रिपोर्ट में पुष्टि होने और पीड़िता के बयानों के आधार पर पचोर थाना पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीनों नाबालिग आरोपियों को अपनी अभिरक्षा (हिरासत) में ले लिया है। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो - POCSO Act) की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

 

पचोर थाना प्रभारी शकुंतला बामनिया ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया:
"मामला बेहद संवेदनशील है और चूंकि तीनों आरोपी नाबालिग हैं, इसलिए पुलिस सरकारी नियमों और किशोर न्याय (Juvenile Justice) अधिनियम के तहत बेहद सतर्कता बरत रही है। तीनों संदेही किशोरों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। कानून के मुताबिक आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से आवश्यक दिशा-निर्देश और मार्गदर्शन भी लिया जा रहा है।"

 

समाज और कानून के सामने गंभीर सवाल
राजगढ़ जिले को शर्मसार करने वाली इस घटना ने एक बार फिर समाज और कानून व्यवस्था के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 9-10 साल की मासूम बच्चियों के साथ होने वाली ऐसी दरिंदगी की घटनाएं समाज की मानसिकता पर एक गहरा धब्बा हैं। स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है और पीड़िता को जल्द से जल्द न्याय दिलाने तथा दोषियों को सख्त से सख्त सजा देने की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि नाबालिगों में बढ़ती इस तरह की आपराधिक प्रवृत्ति को रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता और कड़े कानूनी प्रावधानों का कड़ाई से पालन होना बेहद जरूरी है।

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