शहडोल में करोड़ों की निवेश ठगी का खुलासा: रिटायर्ड कर्मचारियों को दोगुना रकम और नौकरी का झांसा देकर लाखों हड़पे

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मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में संचालित जीएनएस फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (GNS Financial Services Pvt. Ltd.) पर करोड़ों रुपये की निवेश धोखाधड़ी के गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि कंपनी ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों और आम निवेशकों को अधिक ब्याज, नौकरी और पांच वर्षों में रकम दोगुनी करने का लालच देकर करोड़ों रुपये का निवेश कराया और बाद में उनकी राशि लौटाने से इंकार कर दिया।
10 लाख के निवेश पर हर महीने 10 हजार रुपये ब्याज का लालच
हाथीडोल धनपुरी सरईकापा निवासी संतोष बर्मन ने शिकायत में बताया कि कंपनी के एजेंटों ने उन्हें प्रतिष्ठित निवेश संस्थानों में पैसा लगाने का भरोसा दिलाया था। निवेश के बदले 10 लाख रुपये पर प्रति माह 10 हजार रुपये ब्याज तथा पांच वर्षों में राशि दोगुनी होने का आश्वासन दिया गया। बाद में उन्हें पता चला कि उनकी जमा राशि का हिस्सा दूसरी योजनाओं में स्थानांतरित कर दिया गया और वास्तविक निवेश की जानकारी उनसे छिपाई गई।
30 लाख जमा कराने वाले निवेशक को कहा- पैसा डूब गया
गोपालपुर निवासी 61 वर्षीय मोहन सिंह ने आरोप लगाया कि कंपनी के प्रतिनिधियों ने 30 लाख रुपये निवेश करने पर प्रति माह 30 हजार रुपये ब्याज, परिवार के एक सदस्य को नौकरी और पांच साल में निवेश दोगुना करने का वादा किया था। लेकिन जब करीब डेढ़ वर्ष बाद उन्होंने अपनी राशि वापस मांगी तो कंपनी कार्यालय में उन्हें कथित रूप से बताया गया कि पैसा डूब चुका है और वापस नहीं मिलेगा।
निवेश योजनाओं के नाम बदलकर जुटाई करोड़ों की रकम
शिकायतकर्ताओं के अनुसार इस पूरे कथित निवेश घोटाले का मुख्य चेहरा सुखनंदन यादव रहा है। आरोप है कि शुरुआत में निवेशकों से ICICI Services के नाम पर धन जमा कराया गया और 18 प्रतिशत तक वार्षिक ब्याज का लालच दिया गया। करीब तीन वर्षों तक नियमित ब्याज मिलने से लोगों का भरोसा बढ़ता गया।
बाद में जब इस मॉडल पर आपत्तियां सामने आईं तो निवेश को मोतीलाल ओसवाल इन्वेस्टमेंट के नाम से संचालित किया जाने लगा। इसके बाद GNS (ग्रामीण निवेश सेवा) के नाम से नई निवेश योजना शुरू की गई और बड़ी संख्या में लोगों से रकम जमा कराई गई।
जनवरी 2026 से बंद हुआ ब्याज भुगतान
आरोप है कि जनवरी 2026 से निवेशकों को ब्याज का भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया गया। जब लोगों ने अपनी जमा पूंजी वापस मांगनी शुरू की और शिकायतें दर्ज कराईं तो कंपनी का कार्यालय बंद कर दिया गया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इस कथित घोटाले में लगभग 500 निवेशक प्रभावित हुए हैं और कुल निवेश राशि 300 से 400 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है। हालांकि इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि जांच एजेंसियों द्वारा अभी नहीं की गई है।
फर्जी नियुक्ति पत्र और डीमैट खातों में अनियमितता के आरोप
जांच में यह भी सामने आया कि निवेशकों को नौकरी के नाम पर नियुक्ति पत्र दिए गए, लेकिन वेतन और पीएफ संबंधी जानकारी में गंभीर अनियमितताएं थीं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कंपनी के संचालक और एजेंट निवेशकों की अनुमति के बिना उनके डीमैट खातों में शेयरों की खरीद-बिक्री करते रहे। ग्राहकों के ई-मेल और पासवर्ड भी कंपनी के कब्जे में रखे जाते थे और ट्रेडिंग से जुड़े निर्णय स्वयं लिए जाते थे।
पांच लोगों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर
बुढ़ार थाना पुलिस की प्रारंभिक जांच में शिकायतें प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद सुखनंदन यादव, मुकेश यादव, सरोज यादव, विजय पाल और मोहम्मद अमीम के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कमिश्नर सुरभि गुप्ता ने दिए जांच के निर्देश
शहडोल संभाग की कमिश्नर सुरभि गुप्ता ने दोनों मामलों को गंभीरता से लेते हुए संतोष बर्मन के प्रकरण को कलेक्टर शहडोल तथा मोहन सिंह के मामले को उप पुलिस महानिरीक्षक (DIG) शहडोल जोन को जांच के लिए भेज दिया है। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई में लगातार वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, जिनमें लोगों को नौकरी, ऋण स्वीकृति और अधिक मुनाफे का लालच देकर ठगी का शिकार बनाया जा रहा है।
नागरिकों से सतर्क रहने की अपील
कमिश्नर ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के झांसे में आकर धन निवेश न करें। आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाता विवरण, ओटीपी या अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज किसी के साथ साझा न करें। उन्होंने विशेष रूप से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सलाह दी है कि वे अपनी जीवनभर की बचत केवल राष्ट्रीयकृत बैंकों, डाकघरों और अधिकृत वित्तीय संस्थानों में ही निवेश करें।
बढ़ रहे हैं फर्जी निवेश योजनाओं के मामले
प्रशासन का मानना है कि हाल के वर्षों में अधिक ब्याज और कम समय में रकम दोगुनी करने का लालच देकर निवेश ठगी के मामलों में तेजी आई है। प्रशासन ने लोगों से निवेश से पहले संबंधित संस्था की वैधता की जांच करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या प्रशासन को देने की अपील की है।

