टीपू सुल्तान की अंगूठी पर ‘राम’ लिखा था? : शिवाजी महाराज से तुलना पर बढ़ा विवाद

शिवाजी महाराज से तुलना पर बढ़ा विवाद

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टीपू सुल्तान को लेकर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। महाराष्ट्र में कांग्रेस नेता द्वारा उनकी तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से किए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस बहस में अब एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी कूद पड़े हैं। उन्होंने टीपू सुल्तान को अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद बताया और कई ऐतिहासिक दावे पेश किए, जिनमें टीपू की अंगूठी पर “राम” लिखा होने का उल्लेख भी शामिल है।

शिवाजी महाराज से तुलना पर क्यों मचा बवाल?
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने बुलढाणा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि टीपू सुल्तान ने भी अंग्रेजों के खिलाफ उसी तरह संघर्ष किया, जैसे शिवाजी महाराज ने मुगलों के खिलाफ ‘स्वराज’ की स्थापना के लिए किया था। उन्होंने टीपू को “भारत का भूमिपुत्र” बताते हुए उनकी वीरता की प्रशंसा की। इस बयान के बाद भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस तुलना को “शर्मनाक” और “ऐतिहासिक रूप से अनुचित” बताया। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने हिंदवी स्वराज की स्थापना की और उनकी तुलना किसी अन्य शासक से करना उचित नहीं है।

ओवैसी का पलटवार: “टीपू शहीद थे, अंग्रेजों से लड़े”
विवाद के बीच असदुद्दीन ओवैसी ने कांग्रेस नेता का समर्थन करते हुए कहा, टीपू सुल्तान अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद हुए। उन्होंने कभी अंग्रेजों से माफी नहीं मांगी। वे अंत तक तलवार लेकर लड़े। ओवैसी ने तीखे शब्दों में विनायक दामोदर सावरकर से तुलना करते हुए कहा कि टीपू ने कभी दया याचिका नहीं लिखी। उन्होंने यह भी दावा किया कि अंग्रेज टीपू से इतने भयभीत थे कि उनकी मृत्यु के बाद लगभग डेढ़ घंटे तक कोई उनके शव के पास जाने की हिम्मत नहीं कर पाया।

“अंगूठी पर राम लिखा था” — ओवैसी का ऐतिहासिक दावा
ओवैसी ने अपने भाषण में कहा कि जब टीपू सुल्तान का शव मिला, तो उनकी उंगली में जो अंगूठी थी उस पर “राम” लिखा हुआ था। उनका तर्क था कि यह तथ्य उन लोगों के दावों को कमजोर करता है जो टीपू को केवल सांप्रदायिक नजरिए से देखते हैं।

अब्दुल कलाम और गांधी का जिक्र
ओवैसी ने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की पुस्तक Wings of Fire का हवाला देते हुए कहा कि भारत की मिसाइल तकनीक किसी हद तक टीपू सुल्तान की शुरुआती सैन्य तकनीकी सोच से प्रेरित मानी जाती है। इसके अलावा उन्होंने महात्मा गांधी का भी उल्लेख किया और कहा कि गांधी ने अपने लेखन में टीपू को हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बताया था।

फडणवीस को “इतिहास सुधारने” की सलाह
ओवैसी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सलाह दी कि वे सोशल मीडिया की कहानियों के बजाय ऐतिहासिक दस्तावेजों पर भरोसा करें। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के संविधान की मूल प्रति में टीपू सुल्तान का चित्र शामिल है और उस पर देश के प्रमुख नेताओं के हस्ताक्षर हैं।

बढ़ता राजनीतिक तनाव
इस पूरे विवाद ने महाराष्ट्र की राजनीति में ऐतिहासिक विरासत, राष्ट्रवाद और अतीत की व्याख्याओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर भाजपा इस तुलना को अपमानजनक बता रही है, वहीं कांग्रेस और एआईएमआईएम टीपू सुल्तान को अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करने वाला योद्धा बता रही हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।

टीपू सुल्तान को लेकर ऐतिहासिक दावे और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं एक बार फिर यह दिखाती हैं कि भारत में इतिहास केवल अतीत का विषय नहीं, बल्कि वर्तमान की राजनीति का भी केंद्र है।
क्या यह बहस तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझी रहेगी — यह देखना दिलचस्प होगा।