NEET Re-Exam 2026: पेपर सुरक्षा के लिए एयरफोर्स की एंट्री

Aryan Malhotra
4 घंटे पहलेYeh haalat bahut chintajanak hai, jaldi karyawahi ho.
Kunal Rao
5 घंटे पहलेYeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.
Sai Mehta
7 घंटे पहलेCommunity ko mil ke aage aana hoga is mudde par.
Ayaan Khan
9 घंटे पहलेHum is cause ke saath hain, awaaz uthani chahiye.
Harsh Pandya
11 घंटे पहलेAam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.
NEET Re-Exam 2026 को पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और पेपर लीक जैसी घटनाओं से मुक्त कराने के लिए केंद्र सरकार अब बड़े स्तर पर तैयारी में जुट गई है। गुरुवार को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर एक अहम हाईलेवल बैठक आयोजित की गई, जिसमें परीक्षा सुरक्षा और प्रश्नपत्रों के ट्रांसपोर्टेशन को लेकर कई बड़े फैसलों पर चर्चा हुई।
बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि इस बार NEET री-एग्जाम के प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना यानी इंडियन एयरफोर्स की मदद ली जा सकती है। सरकार का मानना है कि इससे पेपर लीक या छेड़छाड़ जैसी आशंकाओं को काफी हद तक रोका जा सकेगा।
21 जून को आयोजित होगा NEET री-एग्जाम
गौरतलब है कि 3 मई को आयोजित हुई NEET परीक्षा पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बाद रद्द कर दी गई थी। इसके बाद राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया और अब 21 जून को NEET Re-Exam आयोजित किया जाएगा।
करीब 23 लाख छात्रों के भविष्य से जुड़े इस एग्जाम को लेकर सरकार इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। यही वजह है कि परीक्षा प्रक्रिया की हर स्तर पर समीक्षा की जा रही है।
बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के वरिष्ठ अधिकारी, पोस्टल विभाग और विभिन्न राज्य सरकारों के अधिकारी शामिल हुए।
करीब 40 मिनट चली बैठक में प्रश्नपत्रों की प्रिंटिंग, पैकिंग, ट्रांसपोर्टेशन और परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुंचाने की पूरी व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई।
एयरफोर्स की मदद लेने पर क्या बोले शिक्षा मंत्री?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अब तक NEET के प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने का काम पोस्टल विभाग करता था। लेकिन इस बार मौसम और सुरक्षा दोनों को ध्यान में रखते हुए एयरफोर्स की सहायता लेने पर विचार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना की मदद से प्रश्नपत्र तेजी और अधिक सुरक्षा के साथ विभिन्न केंद्रों तक पहुंचाए जा सकेंगे। जून के महीने में खराब मौसम की स्थिति को देखते हुए यह कदम काफी अहम माना जा रहा है।
PMO की सीधी निगरानी में पूरी परीक्षा प्रक्रिया
सूत्रों के मुताबिक, NEET पेपर लीक विवाद के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) इस मामले को लेकर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। बताया जा रहा है कि पिछली परीक्षा रद्द करने का फैसला भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर लिया गया था।
अब पेपर सेटिंग, प्रिंटिंग, पैकिंग और ट्रांसपोर्टेशन तक की पूरी प्रक्रिया पर PMO की सीधी निगरानी रखी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को परीक्षा तैयारियों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी लगातार दी जा रही है।
CBI जांच में कई गिरफ्तारियां
पेपर लीक मामले की जांच फिलहाल CBI कर रही है। शिक्षा मंत्रालय की शिकायत के बाद दर्ज केस में दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, पुणे, नासिक, लातूर और अहिल्यानगर समेत कई शहरों में छापेमारी की गई है।
अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। CBI का दावा है कि पेपर लीक के मुख्य स्रोत का पता लगा लिया गया है और अब पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।
पहली बार सेना को मिल सकती है परीक्षा सुरक्षा की जिम्मेदारी
अगर सरकार एयरफोर्स को प्रश्नपत्रों के ट्रांसपोर्टेशन की जिम्मेदारी सौंपती है, तो यह देश में पहली बार होगा जब किसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा की सुरक्षा में भारतीय सेना की सीधी भूमिका होगी।
सरकार का फोकस इस बार परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और सुरक्षित बनाकर छात्रों और अभिभावकों का भरोसा दोबारा कायम करने पर है।
छात्रों और अभिभावकों की उम्मीदें बढ़ीं
NEET पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिली थी। अब सरकार की नई सुरक्षा रणनीति और हाईलेवल मॉनिटरिंग के बाद उम्मीद की जा रही है कि 21 जून को होने वाला री-एग्जाम पूरी तरह शांतिपूर्ण और नकलविहीन तरीके से संपन्न होगा।





