मध्य प्रदेश में गहराया जल संकट: बूंद-बूंद पानी के लिए जान जोखिम में डाल रहे लोग
Tanya Bajaj
0 सेकंड पहलेAam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.
Kavya Mishra
0 सेकंड पहलेJab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.
मध्य प्रदेश में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी अब बड़े जल संकट का रूप लेती जा रही है। राज्य के कई ग्रामीण और आदिवासी इलाकों से ऐसी दर्दनाक तस्वीरें सामने आ रही हैं, जिन्होंने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। कहीं महिलाएं और मासूम बच्चियां गहरे कुओं में उतरकर पानी निकालने को मजबूर हैं, तो कहीं लोग सूखी नदी-नालों में झिरियां खोदकर मटमैला पानी इकट्ठा कर रहे हैं। बढ़ते तापमान और लगातार गिरते भूजल स्तर ने हालात बेहद भयावह बना दिए हैं।
गहरे गड्ढों में उतरकर पानी भर रहीं मासूम बच्चियां
बुरहानपुर और खरगोन जिले के धुलकोट, रगौन और सरबड़ जैसे गांवों में पानी की समस्या सबसे गंभीर रूप में सामने आई है। यहां महिलाएं और छोटी बच्चियां अपनी जान जोखिम में डालकर गहरे खतरनाक गड्ढों और सूखे कुओं में उतर रही हैं। कई जगह पेड़ों की जड़ों का सहारा लेकर नीचे उतरना पड़ रहा है, जबकि पथरीली ढलानों पर हर पल हादसे का खतरा बना रहता है। गड्ढों में जमा पानी इतना गंदा और दूषित है कि उसे देखकर कोई भी घबरा जाए, लेकिन मजबूरी ऐसी है कि ग्रामीण उसी पानी को पीने और घरेलू उपयोग में लाने को विवश हैं।
पानी की तलाश में भटक रहे बच्चे
जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और खिलौने होने चाहिए, उस उम्र में वे खाली बर्तन लेकर कई किलोमीटर दूर पानी की तलाश में भटक रहे हैं। तपती धूप और नंगे पैर पहाड़ियों के बीच उतरकर बच्चियां घंटों तक पानी भरने का इंतजार करती हैं। कई बार एक बर्तन भरने में घंटों लग जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सुबह चार बजे से महिलाएं पानी की तलाश में निकल जाती हैं और दोपहर तक वापस लौटती हैं। कई परिवारों को पूरे दिन में मुश्किल से कुछ बाल्टी पानी ही मिल पाता है।
हैंडपंप और नलजल योजनाएं हुईं बेअसर
ग्रामीण इलाकों में कई हैंडपंप बंद पड़े हैं, जबकि तालाब और कुएं पूरी तरह सूख चुके हैं। लोगों का आरोप है कि नलजल योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह गई हैं। गर्मी बढ़ने के साथ हालात और ज्यादा बिगड़ते जा रहे हैं। इंदौर और विदिशा जैसे शहरी क्षेत्रों में भी बोरवेल सूखने लगे हैं, जिसके चलते लोग पानी के टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं। इंदौर नगर निगम द्वारा 650 से अधिक टैंकरों के जरिए पानी सप्लाई की जा रही है।
दूषित पानी से फैल रहीं बीमारियां
गांवों में गंदा पानी पीने के कारण बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। पेट दर्द, उल्टी, बुखार और त्वचा रोग जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। गरीब परिवारों के पास न तो इलाज की सुविधा है और न ही साफ पानी का विकल्प। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को कई बार समस्या बताई गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है।
बढ़ती गर्मी और गिरता भूजल बना बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार कम बारिश, अत्यधिक गर्मी और लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण आने वाले दिनों में जल संकट और गंभीर हो सकता है। मध्य प्रदेश के कई आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो ने लोगों को भावुक कर दिया है। इंटरनेट यूज़र्स जल संरक्षण और जल प्रबंधन को लेकर सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं।
विकास के दावों पर उठे सवाल
धुलकोट और आसपास के गांवों की तस्वीरें विकास और हर घर जल योजना के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही हैं। एक तरफ शहरों में पानी की बर्बादी हो रही है, वहीं दूसरी ओर गांवों में लोग एक-एक बूंद पानी के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं। यह सिर्फ जल संकट नहीं, बल्कि संवेदनाओं और व्यवस्थाओं के सूख जाने की भी कहानी बन चुकी है।






