RDVV में छात्रा को बिना कॉपी जांचे किया फेल: 11 नंबर देकर रोका रिजल्ट

Vaishali shinde
0 सेकंड पहलेYeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.
Trapti Tanwar
0 सेकंड पहलेYeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.
Harsh Pandya
0 सेकंड पहलेYeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.
Trapti Tanwar
0 सेकंड पहलेCommunity ko mil ke aage aana hoga is mudde par.
मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) एक बार फिर अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है। विश्वविद्यालय में एक छात्रा को बिना उत्तर पुस्तिका ठीक से जांचे फेल किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
छात्रा निकिता रजक ने लगाए गंभीर आरोप
बीपीएड की छात्रा निकिता रजक ने आरोप लगाया है कि उसकी कॉपी को ठीक से जांचे बिना ही उसे फेल कर दिया गया। छात्रा के मुताबिक उसे एक विषय में 70 में से केवल 11 अंक दिए गए, जबकि बाकी 7 विषयों में वह पास है।
निकिता का कहना है कि जब उसने नियमों के तहत अपनी उत्तर पुस्तिका देखने की मांग की, तब सामने आया कि कई उत्तरों पर परीक्षक के निशान तक नहीं थे। छात्रा ने दावा किया कि कॉपी के पन्ने ठीक से पलटे तक नहीं गए और सीधे कम अंक दर्ज कर दिए गए।
पेपर चेकिंग का वीडियो आने से बढ़ा विवाद
इस पूरे मामले में पेपर जांच प्रक्रिया का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसने विवाद को और बढ़ा दिया है। वीडियो में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।
कुलगुरु ने दिए जांच के आदेश
मामला कुलगुरु राजेश कुमार वर्मा तक पहुंचने के बाद उन्होंने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। कुलगुरु ने कहा कि छात्रा की कॉपी की दोबारा जांच कराई जाएगी और यदि जांच में कोई लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
करियर पर मंडरा रहा खतरा
छात्रा निकिता रजक ने बताया कि एमपीएड में प्रवेश के लिए आवेदन की अंतिम तिथि नजदीक है। ऐसे में यदि उसका रिजल्ट समय पर ठीक नहीं हुआ तो उसका पूरा एक साल बर्बाद हो सकता है। छात्रा ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जल्द न्याय दिलाने की मांग की है।
परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर उठे सवाल
इस घटना ने विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली और मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि यदि बिना जांचे कॉपियों में अंक दिए जा रहे हैं, तो यह विद्यार्थियों के भविष्य के साथ बड़ा खिलवाड़ है।
छात्रों में बढ़ा आक्रोश
मामला सामने आने के बाद छात्रों में भी नाराजगी देखने को मिल रही है। कई छात्रों ने परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है। अब सभी की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है।






