मुस्लिम दोस्त ने बचाई हिंदू बुजुर्ग की जान: महोबा से सामने आई इंसानियत और भाईचारे की मिसाल
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उत्तर प्रदेश के महोबा से सामने आई एक तस्वीर और वीडियो ने पूरे देश का दिल जीत लिया है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही इस घटना में एक मुस्लिम बुजुर्ग अपने हिंदू संत मित्र की सेवा करते दिखाई दे रहे हैं। कोई उन्हें सहारा दे रहा है, कोई अपने हाथों से जूते पहना रहा है, तो कोई अस्पताल में हर पल साथ खड़ा नजर आ रहा है। यह दृश्य सिर्फ दोस्ती नहीं, बल्कि इंसानियत और सांप्रदायिक सौहार्द की सबसे खूबसूरत मिसाल बन गया है।
सड़क पर घायल होकर गिरे 86 वर्षीय मुरलीधर तिवारी
बताया जा रहा है कि महोबा के प्रिय शेख नगर मोहल्ले में रहने वाले 86 वर्षीय मुरलीधर तिवारी तिवारी बाजार की ओर जा रहे थे। इसी दौरान उनके पैर में कांच लग गया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। काफी खून बहने के बाद वह सड़क पर गिर पड़े और बेहोश हो गए। आसपास मौजूद लोग तमाशबीन बने रहे, लेकिन किसी ने तुरंत मदद नहीं की।
दोस्त इशहाक खान फरिश्ता बनकर पहुंचे
घटना की जानकारी जैसे ही उनके पुराने मित्र इशहाक खान को मिली, वह तुरंत मौके पर पहुंचे। इशहाक ने बिना समय गंवाए अपने हिंदू मित्र को गोद में उठाया और बाइक से अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू किया, जिससे मुरलीधर तिवारी की जान बच गई।
अस्पताल में सेवा का वीडियो हुआ वायरल
अस्पताल से सामने आए वीडियो में इशहाक खान अपने दोस्त की सेवा करते नजर आ रहे हैं। वह उन्हें सहारा देते हैं, बिस्तर से उठाते हैं और अपने हाथों से चप्पल पहनाते दिखाई देते हैं। इस भावुक दृश्य ने लाखों लोगों को भावुक कर दिया है। सोशल मीडिया पर लोग इसे “धर्म से ऊपर इंसानियत” की असली तस्वीर बता रहे हैं।
10 साल पुरानी दोस्ती बनी मिसाल
स्थानीय लोगों के अनुसार, मुरलीधर तिवारी और इशहाक खान पिछले लगभग 10 वर्षों से पड़ोसी और घनिष्ठ मित्र हैं। दोनों के बीच धर्म कभी दीवार नहीं बना। यही वजह है कि संकट की घड़ी में इशहाक अपने दोस्त के लिए सबसे पहले खड़े नजर आए।
सोशल मीडिया पर लोगों ने की जमकर तारीफ
यह वीडियो वायरल होने के बाद लोग लगातार दोनों दोस्तों की तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि आज के दौर में ऐसी तस्वीरें समाज को जोड़ने का काम करती हैं। लोगों का कहना है कि अगर इंसानियत जिंदा हो, तो धर्म और जाति कभी रिश्तों के बीच नहीं आ सकते।
समाज को मिला बड़ा संदेश
महोबा से सामने आई यह कहानी सिर्फ एक दोस्ती की कहानी नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सीख है। जब दुनिया धर्म और जाति के नाम पर बंटी दिखाई देती है, तब ऐसी घटनाएं यह याद दिलाती हैं कि असली रिश्ता इंसानियत का होता है।






