जिस उंगली को पकड़कर चलना सिखाया: रायबरेली में बुजुर्ग की सिसकियाँ

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रायबरेली में बुजुर्ग की सिसकियाँ

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उत्तर प्रदेश के रायबरेली से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत और पारिवारिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस पिता ने अपने बेटे को उंगली पकड़कर चलना सिखाया, पढ़ाया-लिखाया और अपनी पूरी जिंदगी उसकी परवरिश में खपा दी — उसी बेटे ने बुढ़ापे में उसे बीच सड़क पर लावारिस छोड़ दिया। आज वही बुजुर्ग पिता दर-दर भटकने को मजबूर हैं। उनकी सिसकियाँ सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि बदलते समाज की कड़वी हकीकत बयां कर रही हैं।

लाचार पिता की दर्दभरी दास्तान
जानकारी के अनुसार, बुजुर्ग पिता ने अपनी पूरी जमापूंजी, खेत-खलिहान और मेहनत की कमाई बेटे के भविष्य के नाम कर दी। बेटे को पढ़ाया, बड़ा बनाया और समाज में स्थापित किया। लेकिन बुढ़ापे में जब सहारे की जरूरत पड़ी, तब उसी बेटे ने मुंह मोड़ लिया। बताया जा रहा है कि पिता को घर से निकाल दिया गया और बीच राह छोड़ दिया गया।
पिता की आंखों में आंसू हैं और होंठों पर सिर्फ एक सवाल — "क्या मैंने अपने बेटे को यही संस्कार दिए थे?"

आलीशान जिंदगी, लेकिन रिश्तों में दरार
बताया जाता है कि बेटे आज आर्थिक रूप से सक्षम हैं और अच्छे घरों में रहते हैं। लेकिन जिस पिता ने उनकी नींव रखी, वही आज बेसहारा है। यह घटना बताती है कि आधुनिकता और आर्थिक तरक्की के बीच कहीं न कहीं मानवीय संवेदनाएं खोती जा रही हैं।

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