बढ़ती नफरत पर सहर शेख का पलटवार: “दूसरों पर उंगली उठाने से पहले खुद को देखें”

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Monika Das

Monika Das

0 सेकंड पहले

Kya koi aur khabar bhi aane wali hai is topic par?

Ananya Sharma

Ananya Sharma

0 सेकंड पहले

Hamara media aisa hi hona chahiye, sach aur saaf.

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आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया एक सशक्त मंच बन चुका है, लेकिन इसके साथ ही नफरत, ट्रोलिंग और व्यक्तिगत हमलों का चलन भी तेजी से बढ़ा है। बिना तथ्यों की पुष्टि किए लोगों को निशाना बनाना आम बात होती जा रही है। हाल ही में दिए गए एक बयान में इस प्रवृत्ति पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जिसमें कहा गया कि दूसरों की पहचान या ‘जाति प्रमाण पत्र’ पर सवाल उठाने से पहले लोगों को खुद के भीतर झांकना चाहिए।

 

सहर शेख का जवाब: आरोप पूरी तरह निराधार
एआईएमआईएम की पार्षद सहर शेख ने अपने खिलाफ लगाए गए ‘फर्जी जाति प्रमाण पत्र’ के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। मुंब्रा (ठाणे) से निर्वाचित सहर शेख ने अपने पिता यूनुस शेख के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि ये आरोप पूरी तरह झूठे और राजनीतिक साजिश का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि उनकी छवि खराब करने के लिए जानबूझकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है, जिसे वे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगी।

 

ट्रोलिंग और ऑनलाइन हमलों पर कड़ी प्रतिक्रिया
सहर शेख ने सोशल मीडिया पर चल रहे “प्रतिकूल प्रचार और ट्रोलिंग” पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह की नफरत भरी भाषा और व्यक्तिगत हमले समाज में असंतुलन पैदा करते हैं और कई बार गंभीर घटनाओं को जन्म दे सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि चुप रहना हमेशा कमजोरी नहीं होता, बल्कि कई बार यह समझदारी का संकेत होता है। लेकिन जब बात मर्यादा से बाहर चली जाए, तो आवाज उठाना जरूरी हो जाता है।

 

नमिता थापर जैसी हस्तियां भी नहीं बचीं
हाल ही में प्रसिद्ध बिजनेसवुमन नमिता थापर को भी सोशल मीडिया पर भद्दी ट्रोलिंग और गालियों का सामना करना पड़ा। यह दिखाता है कि ऑनलाइन हेट स्पीच अब आम लोगों से लेकर बड़े नामों तक सभी को प्रभावित कर रही है।

 

मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन ट्रोलिंग का असर सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालता है। खासकर महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हेट स्पीच समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है।

 

कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
सहर शेख ने साफ किया है कि वे उन्हें बदनाम करने वाले लोगों, राजनीतिक संगठनों और मीडिया के कुछ वर्गों के खिलाफ कानूनी नोटिस जारी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि वे अदालत में इन सभी आरोपों का सामना करेंगी और सच्चाई सामने लाएंगी।

 

भाषा विवाद पर भी दिया जवाब
मराठी भाषा को लेकर हुए विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए सहर शेख ने कहा कि वे मराठी में सहज नहीं हैं और हिंदी में बात करना पसंद करती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी पर कोई भाषा थोपी नहीं जा सकती और इस मुद्दे पर उन्हें ट्रोल करना गलत है।

 

सोशल मीडिया आज जहां संवाद का माध्यम है, वहीं यह नफरत फैलाने का प्लेटफॉर्म भी बनता जा रहा है। सहर शेख का मामला इस बात की याद दिलाता है कि डिजिटल जिम्मेदारी और संवेदनशीलता कितनी जरूरी है। बिना तथ्यों के आरोप और व्यक्तिगत हमले न केवल किसी की छवि खराब करते हैं, बल्कि समाज में तनाव भी बढ़ाते हैं।

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Monika Das

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Hamara media aisa hi hona chahiye, sach aur saaf.

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