सतना सेंट्रल जेल की अनोखी प्रेम कहानी: महिला जेल अधिकारी ने उम्रकैद काट चुके कैदी संग लिए सात फेरे

Priya Iyer
0 सेकंड पहलेYeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.
Anil Sen
11 घंटे पहलेAam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.
Vivaan Gupta
14 घंटे पहलेYeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.
मध्य प्रदेश के सतना और छतरपुर से सामने आई एक अनोखी प्रेम कहानी इन दिनों पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है। सतना सेंट्रल जेल की सहायक जेल अधीक्षक फिरोजा खातून ने हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट चुके धर्मेंद्र सिंह के साथ हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कर समाज को चौंका दिया है। यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लग सकती है, लेकिन हकीकत में यह रिश्ता जेल की चारदीवारी के भीतर शुरू हुआ और आखिरकार सात फेरों तक पहुंच गया।
जेल की ड्यूटी के दौरान हुई मुलाकात, फिर बढ़ता गया रिश्ता
जानकारी के मुताबिक, फिरोजा खातून सतना सेंट्रल जेल में वारंट शाखा की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। उसी दौरान धर्मेंद्र सिंह जेल में वारंट संबंधी कार्यों में सहयोग करता था। लगातार मुलाकातों और कामकाजी बातचीत के बीच दोनों के बीच दोस्ती हुई, जो धीरे-धीरे गहरे प्रेम संबंध में बदल गई।
धर्मेंद्र सिंह छतरपुर जिले के चंदला का रहने वाला है और साल 2007 में नगर परिषद उपाध्यक्ष कृष्णदत्त दीक्षित की हत्या एवं शव दफनाने के चर्चित मामले में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। करीब 14 वर्षों तक जेल में रहने के बाद अच्छे आचरण के आधार पर उसे रिहा कर दिया गया था। जेल से बाहर आने के बाद भी दोनों का रिश्ता कायम रहा और आखिरकार उन्होंने शादी करने का फैसला कर लिया।
परिवार की नाराजगी के बीच हिंदू रीति-रिवाज से हुई शादी
5 मई को छतरपुर जिले के लवकुशनगर में वैदिक मंत्रोच्चार और हिंदू रीति-रिवाज के बीच दोनों का विवाह संपन्न हुआ। शादी में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखने वाली फिरोजा खातून के परिजन इस रिश्ते से नाराज बताए गए और समारोह में शामिल नहीं हुए।
ऐसे में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ता आगे आए। विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष राजबहादुर मिश्रा और उनकी पत्नी ने कन्यादान की रस्म निभाई और फिरोजा को अपनी बेटी मानकर धर्मेंद्र सिंह को सौंपा। शादी समारोह में कई सामाजिक संगठनों के लोग मौजूद रहे।
प्रेम ने तोड़ी धर्म और समाज की दीवारें
यह विवाह अब केवल एक निजी रिश्ता नहीं बल्कि सामाजिक चर्चा का बड़ा विषय बन चुका है। कोई इसे प्रेम की जीत बता रहा है तो कोई सामाजिक और धार्मिक सीमाओं से ऊपर उठकर लिया गया साहसी फैसला मान रहा है।
जेल अधिकारियों, कर्मचारियों और यहां तक कि कई कैदियों ने भी इस नवविवाहित जोड़े को शुभकामनाएं दी हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र में यह शादी गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक सौहार्द की मिसाल के रूप में देखी जा रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई प्रेम कहानी
शादी की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद सोशल media पर यह मामला तेजी से वायरल हो गया। लोग इस रिश्ते को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोग इसे “मोहब्बत की असली मिसाल” बता रहे हैं, तो कुछ इसे समाज के बदलते नजरिए से जोड़कर देख रहे हैं।
जगजीत सिंह की मशहूर पंक्तियां — “न उम्र की सीमा हो, न जन्म का हो बंधन…” — इस कहानी पर बिल्कुल सटीक बैठती नजर आ रही हैं।
प्रेम कहानी बनी पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र
सतना सेंट्रल जेल से शुरू हुई यह अनोखी प्रेम कहानी अब पूरे मध्य प्रदेश में चर्चा का केंद्र बन चुकी है। धर्म, समाज और अतीत की तमाम दीवारों को पार कर दोनों ने साथ जीवन बिताने का फैसला लिया और अपने रिश्ते को नया नाम दे दिया।
यह कहानी एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या प्यार वास्तव में हर सीमा से बड़ा होता है?





