जाति के नाम पर इंसानियत शर्मसार: नागरकुरनूल में मंदिर विवाद के बाद 2 महीने की बच्ची की मौत
तेलंगाना के नागरकुर्नूल जिले के कुम्मेरा गांव से एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां एक धार्मिक मेले के दौरान मंदिर में प्रवेश को लेकर हुए विवाद के बाद दो महीने की एक मासूम बच्ची की मौत हो गई।
घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि मंदिर में प्रवेश को लेकर उनसे 100 रुपये मांगे गए और विरोध करने पर उनके साथ जातिसूचक गालियां दी गईं तथा मारपीट की गई। इस घटना ने एक बार फिर समाज में मौजूद जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मंदिर प्रवेश को लेकर हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार यह घटना 18 फरवरी को कुम्मेरा गांव में आयोजित मल्लन्ना जातरा धार्मिक मेले के दौरान हुई। पीड़ित परिवार चकाली (धोबी) समुदाय से संबंध रखता है, जो पिछड़ा वर्ग माना जाता है। परिवार की दादी चिलुकेश्वरम चंद्रकला ने आरोप लगाया कि मंदिर के प्रवेश द्वार पर कुछ लोगों ने उनसे 100 रुपये प्रवेश शुल्क के रूप में मांगे, जबकि मंदिर में आमतौर पर प्रवेश निःशुल्क होता है। जब परिवार ने इसका विरोध किया तो कथित तौर पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया।
मारपीट के दौरान मची अफरा-तफरी
परिवार का आरोप है कि जब उनके बेटे गणेश ने इस व्यवहार का विरोध किया तो स्थिति अचानक हिंसक हो गई। कथित तौर पर कुछ लोगों ने गणेश पर धातु की छड़ से हमला कर दिया और परिवार की महिलाओं के साथ भी धक्का-मुक्की की गई।
इसी अफरा-तफरी के दौरान दो महीने की बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। परिवार का कहना है कि बच्ची को बचाने की कोशिश की गई लेकिन स्थिति बिगड़ती चली गई।
तीन दिन बाद हुई बच्ची की मौत
घटना के बाद बच्ची को इलाज के लिए ले जाया गया, लेकिन 21 फरवरी को उसकी मौत हो गई। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि झगड़े के दौरान उनके सोने के आभूषण, मोबाइल फोन और करीब 1 लाख रुपये नकद छीन लिए गए। साथ ही उन्हें धमकी दी गई कि यदि वे गांव लौटे तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
पुलिस जांच और तीन आरोपी गिरफ्तार
नागरकुर्नूल पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर संदिग्ध मृत्यु, मारपीट और शांति भंग करने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। बाद में जांच के दौरान एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम और हत्या के प्रयास से जुड़ी धाराएं भी जोड़ी गईं। अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और मामले की जांच जारी है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोट के स्पष्ट संकेत नहीं
पुलिस के अनुसार बच्ची का पोस्टमार्टम कराया गया है। प्रारंभिक रिपोर्ट में शरीर पर किसी भी प्रकार की बाहरी या आंतरिक चोट के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। हालांकि, नमूनों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है और अंतिम रिपोर्ट के बाद ही मौत के सही कारण का पता चल पाएगा।
मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए तेलंगाना मानवाधिकार आयोग (TGHRC) ने इस घटना का संज्ञान लिया है। आयोग ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि मामले में अब तक की कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट 24 मार्च तक प्रस्तुत की जाए। इसके साथ ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है।
न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन
बच्ची की मौत के बाद कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। बीसी, एससी और एसटी संगठनों ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों में जातिगत भेदभाव जैसी घटनाएं समाज के लिए बेहद चिंताजनक हैं।
बड़ा सवाल – क्या आज भी जाति भगवान से बड़ी?
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर समाज के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है — क्या 2026 के भारत में भी किसी इंसान की पहचान उसकी जाति से तय होगी? धार्मिक स्थल जहां आस्था और एकता का प्रतीक होने चाहिए, वहां यदि भेदभाव और हिंसा की घटनाएं सामने आती हैं तो यह पूरे समाज के लिए चिंतन का विषय है।
दो महीने की मासूम बच्ची की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। जहां एक ओर परिवार न्याय की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन और जांच एजेंसियों पर सच्चाई सामने लाने की जिम्मेदारी है।
निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई ही इस मामले में न्याय सुनिश्चित कर सकती है।

