गाजियाबाद में अन्नदाता पर बरसीं लाठियां: 60 से ज्यादा किसान घायल
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उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के लोनी थाना क्षेत्र अंतर्गत मीरपुर हिंदू गांव में रविवार, 15 फरवरी 2026 को प्रस्तावित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट (डंपिंग ग्राउंड) के विरोध में प्रदर्शन हिंसक झड़प में बदल गया। स्थानीय किसान और ग्रामीण इस जमीन पर डंपिंग ग्राउंड के बजाय स्कूल या अस्पताल बनाने की मांग कर रहे थे।
रविवार दोपहर प्रदर्शन के दौरान किसानों और पुलिस के बीच तीखी बहस शुरू हुई, जो जल्द ही पथराव और लाठीचार्ज में तब्दील हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया, जिसमें 50 से 60 लोग घायल हुए हैं।
कैसे भड़की हिंसा?
ग्रामीणों के अनुसार, वे लंबे समय से इलाके में बने कचरा निस्तारण प्लांट का विरोध कर रहे थे। उनका तर्क है कि डंपिंग ग्राउंड से बीमारियां फैलेंगी और पर्यावरण प्रदूषित होगा।
रविवार को प्रदर्शनकारियों ने प्लांट के मुख्य गेट का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश करने की कोशिश की और धरने पर बैठ गए। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। पुलिस का कहना है कि भीड़ ने पथराव किया, जिसमें दो पुलिसकर्मी घायल हुए। वहीं प्रदर्शनकारियों का दावा है कि लाठीचार्ज में बुजुर्गों और महिलाओं सहित करीब 60 लोग घायल हुए हैं।
लाठीचार्ज बनाम पथराव
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारियों को चोटें दिखाते हुए देखा जा सकता है। किसान मनोज कुमार ने आरोप लगाया कि कई लोगों के सिर और हाथों में गंभीर चोटें आई हैं।
लोनी के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) सिद्धार्थ गौतम ने लाठीचार्ज के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि पुलिस ने केवल स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। उन्होंने बताया कि पथराव में पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।
अस्पताल में भर्ती घायल
ग्रामीणों का दावा है कि एक महिला के सिर में गंभीर चोट आई है, जबकि एक व्यक्ति का कूल्हा टूटने की भी सूचना है। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और 150 से अधिक लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। स्थिति फिलहाल तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है।
किसान संगठनों की एंट्री
घटना की जानकारी मिलते ही भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के मौके पर पहुंचने की सूचना है। किसान संगठनों ने घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
मुख्य सवाल
क्या डंपिंग ग्राउंड की जगह स्कूल या अस्पताल बन सकता है?
क्या प्रशासन ने किसानों से पर्याप्त संवाद किया?
क्या बल प्रयोग टाला जा सकता था?
लोनी की यह घटना प्रशासन और किसानों के बीच संवाद की कमी और बढ़ते अविश्वास को दर्शाती है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस विवाद का समाधान किस तरह निकालता है।

