श्रावस्ती में गैस संकट से हाहाकार: घंटों लाइन में खड़ी महिलाएं बेहोश
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श्रावस्ती जिले में रसोई गैस को लेकर हालात बेहद गंभीर होते नजर आ रहे हैं। गैस सिलेंडर के लिए लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं, जहां महिलाएं और बुजुर्ग घंटों धूप में खड़े रहने को मजबूर हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लोग लाइन में ही बेहोश हो रहे हैं।
लाइन में खड़ी महिला बेहोश, मौके पर हड़कंप
इकौना स्थित अभिषेक गैस एजेंसी पर बुधवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब लाइन में खड़ी सबीना नाम की महिला अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी। बताया जा रहा है कि वह सुबह 5 बजे से ही लाइन में खड़ी थीं। तेज धूप और लंबी प्रतीक्षा के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें संभाला और प्राथमिक उपचार दिया, जिसके बाद उनकी हालत सामान्य हो सकी।
गैस के लिए झड़प, दो महिलाएं घायल
गैस सिलेंडर लेने की होड़ में लोगों के बीच विवाद भी बढ़ता जा रहा है। इसी दौरान लाइन में खड़े लोगों के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की और झड़प में बदल गई। इस घटना में दो महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।
उपभोक्ताओं का आरोप—कई दिनों से नहीं मिल रहा सिलेंडर
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई दिनों से गैस सिलेंडर की भारी कमी बनी हुई है। लोगों को एजेंसियों के कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन फिर भी उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पा रहा।
सबीना का कहना है: वह पिछले 4 दिनों से एजेंसी के चक्कर लगा रही थीं, घंटों लाइन में खड़े रहने के बावजूद खाली हाथ लौटना पड़ा,
आपूर्ति और कीमतों ने बढ़ाई परेशानी
गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों और अनियमित आपूर्ति के कारण लोगों में जल्द से जल्द सिलेंडर लेने की होड़ मच गई है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए एजेंसियों पर पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से हालात और बिगड़ रहे हैं।
प्रशासन का दावा—कोई किल्लत नहीं
जिला प्रशासन ने गैस की कमी से साफ इनकार किया है।
जिलाधिकारी अश्विनी कुमार पांडेय के अनुसार: जिले में लगभग 2.35 लाख गैस कनेक्शन हैं, इनमें 1.50 लाख उज्ज्वला योजना के तहत हैं, उज्ज्वला लाभार्थियों को 25 दिन और सामान्य उपभोक्ताओं को 30 दिन में सिलेंडर दिया जा रहा है, OTP के आधार पर समय पर वितरण किया जा रहा है, उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और भीड़ न लगाने की अपील की है।
अंतरराष्ट्रीय हालात का भी असर
बताया जा रहा है कि ईरान-इजराइल-अमेरिका तनाव के चलते गैस की मांग अचानक बढ़ गई है, जिससे बुकिंग सर्वर तक प्रभावित हो गए हैं। इसका असर अब भारत के छोटे जिलों तक देखने को मिल रहा है।
बड़े सवाल
अगर किल्लत नहीं है तो लंबी कतारें क्यों?
महिलाएं बेहोश क्यों हो रही हैं?
गैस वितरण प्रणाली में खामियां कब सुधरेंगी?
आम जनता को राहत कब मिलेगी?
श्रावस्ती की यह तस्वीर केवल एक जिले की समस्या नहीं, बल्कि सिस्टम की खामियों को उजागर करती है। जहां एक तरफ प्रशासन सब कुछ सामान्य बता रहा है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

