गोल्डन कार्ड है, पर इलाज नहीं: “मोदी का कार्ड” जेब में
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बागेश्वर से सामने आया एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में 80 वर्षीय बुजुर्ग आयुष्मान कार्ड के जरिए पत्नी का इलाज कराने में आई परेशानियों को फर्राटेदार अंग्रेजी में बयां करते नजर आ रहे हैं। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब उन्होंने अपनी आपबीती कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत के सामने रखी।
गोल्डन कार्ड, फिर भी नहीं मिला इलाज?
सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत योजना) के तहत लाभार्थियों को “गोल्डन कार्ड” दिया जाता है, जिससे वे सूचीबद्ध अस्पतालों में मुफ्त इलाज करा सकते हैं। लेकिन बागेश्वर के इस बुजुर्ग का आरोप है कि जब वे पत्नी का इलाज कराने हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल पहुंचे, तो वहां आयुष्मान कार्ड पर इलाज देने से साफ इनकार कर दिया गया।
उनका कहना है कि पत्नी दर्द से तड़प रही थीं, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने कागजी प्रक्रियाओं और तकनीकी कारणों का हवाला देकर भर्ती करने से मना कर दिया। आखिरकार, मजबूरी में उन्हें अपनी जेब से पैसे देकर इलाज कराना पड़ा।
वायरल वीडियो में फर्राटेदार अंग्रेजी ने चौंकाया
वीडियो में बुजुर्ग बेहद आत्मविश्वास के साथ अंग्रेजी में अपनी पूरी कहानी कमिश्नर को समझाते नजर आते हैं।
उनकी स्पष्ट और प्रभावशाली अंग्रेजी सुनकर वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए। सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं — "उम्र 80 साल, लेकिन हिम्मत और आत्मविश्वास 18 साल का!" वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग आयुष्मान योजना की जमीनी हकीकत पर सवाल उठा रहे हैं।
कमिश्नर ने लिया बड़ा फैसला
मामले की गंभीरता को देखते हुए कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने तत्काल जांच के निर्देश दिए।
बताया जा रहा है कि संबंधित निजी अस्पतालों से जवाब तलब किया गया है और यदि आयुष्मान कार्ड धारकों को इलाज से वंचित किया गया है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में ऐसी शिकायतों के लिए विशेष मॉनिटरिंग तंत्र बनाया जाएगा।
क्या योजनाएं केवल विज्ञापनों तक सीमित?
यह घटना कई बड़े सवाल खड़े करती है:
क्या आयुष्मान योजना का लाभ जमीनी स्तर तक सही तरीके से पहुंच रहा है?
क्या निजी अस्पताल मनमानी कर रहे हैं?
क्या गरीब और बुजुर्ग मरीजों को अब भी इलाज के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है?
सरकार द्वारा योजना के प्रचार में बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई कभी-कभी अलग तस्वीर पेश करती है।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
वीडियो वायरल होने के बाद लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं:
“अगर आयुष्मान कार्ड पर इलाज नहीं मिलेगा, तो इसका फायदा क्या?”
“प्राइवेट अस्पतालों पर सख्ती जरूरी है।”
“बुजुर्ग की हिम्मत को सलाम।”
आयुष्मान भारत योजना क्या है?
प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज कवर मिलता है। देशभर के सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पताल इस योजना से जुड़े हैं।लेकिन समय-समय पर अस्पतालों द्वारा कार्ड स्वीकार न करने या तकनीकी बहानों से मरीजों को लौटाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
आगे क्या?
अब सबकी निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। अगर दोषी अस्पतालों पर सख्त कदम उठाया जाता है, तो यह अन्य अस्पतालों के लिए भी चेतावनी साबित हो सकता है।
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