लखनऊ में फर्जी कॉल सेंटर पर बड़ी कार्रवाई: 119 आरोपियों को दबोचा

Riya Jain
0 सेकंड पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Ravi sinha
0 सेकंड पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Ishaan Tiwari
0 सेकंड पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया। जांच के दौरान बड़ी संख्या में कंप्यूटर, मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए। पुलिस का कहना है कि गिरोह लंबे समय से विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर ठगी कर रहा था। मामले की विस्तृत जांच जारी है।
119 आरोपियों की गिरफ्तारी
छापेमारी के दौरान कुल 119 लोगों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों पर विदेशी नागरिकों को फर्जी तकनीकी सहायता, बैंकिंग और निवेश के नाम पर ठगने का आरोप है। पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है और उनके नेटवर्क की कड़ियां तलाश रही है। कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं।
विदेशियों को बनाया जाता था निशाना
जांच में सामने आया कि गिरोह विदेशी नागरिकों को फोन और इंटरनेट के माध्यम से संपर्क करता था। उन्हें झूठे ऑफर, तकनीकी समस्या और वित्तीय सहायता के बहाने विश्वास में लेकर पैसे ऐंठे जाते थे। इस तरीके से करोड़ों रुपये की ठगी किए जाने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस लेनदेन के रिकॉर्ड भी खंगाल रही है।
इंटरपोल की अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई
इंटरपोल ने मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान 201 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई कई देशों की सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से की गई। अभियान का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के नेटवर्क को खत्म करना था। अधिकारियों ने कई डिजिटल ठिकानों पर भी छापे मारे।
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जांच तेज
भारतीय एजेंसियां और अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने में जुटी हैं। डिजिटल डेटा और बैंकिंग रिकॉर्ड की मदद से ठगी के पैसों के स्रोत और गंतव्य की जांच की जा रही है। जांच में कई और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
साइबर अपराध पर सख्त कार्रवाई
इस संयुक्त कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, ईमेल या ऑनलाइन ऑफर पर बिना सत्यापन भरोसा न करें। संदिग्ध गतिविधि मिलने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस को सूचना दें। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे अभियानों को आगे भी जारी रखा जाएगा।








