गाजा में गहराया मानवीय संकट: भुखमरी, कुपोषण और लगातार हमलों से बिगड़ते हालात

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Neha Tripathi

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India ka is maamle mein kya role hoga?

Pooja Reddy

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Hum sabko milke is global challenge ka samna karna hoga.

Reyansh Joshi

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Hum sabko milke is global challenge ka samna karna hoga.

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गाजा पट्टी में जारी संघर्ष के बीच मानवीय संकट लगातार गहराता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र (UN), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और मानवीय एजेंसियों की हालिया रिपोर्टों के अनुसार, आम नागरिक—विशेषकर महिलाएं और बच्चे—सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। लगातार सैन्य कार्रवाई, सीमित मानवीय सहायता और आवश्यक वस्तुओं की कमी के कारण लाखों लोगों का जीवन संकट में है।

 

60 हजार से अधिक फिलिस्तीनियों की मौत का दावा
संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) के अनुसार, अक्टूबर 2023 से अब तक गाजा में 60,000 से अधिक फिलिस्तीनियों के मारे जाने की सूचना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च में संघर्ष दोबारा तेज होने के बाद लगभग 9,000 लोगों की मौत हुई, जबकि केवल 23 से 30 जुलाई के बीच 640 लोगों के मारे जाने की जानकारी सामने आई है।
इसके अलावा, भोजन की तलाश में निकले नागरिकों पर भी खतरा बढ़ा है। 27 मई से अब तक ऐसे 1,239 लोगों की मौत और 8,152 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना दी गई है।

 

भुखमरी और कुपोषण ने लिया भयावह रूप
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, अक्टूबर 2023 से अब तक कुपोषण से जुड़ी 154 मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें 89 बच्चे शामिल हैं। इनमें से 63 मौतें केवल जुलाई महीने में हुईं।
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार जुलाई में 81 प्रतिशत परिवारों ने भोजन की गंभीर कमी की जानकारी दी, जबकि अप्रैल में यह आंकड़ा 33 प्रतिशत था। वहीं 24 प्रतिशत परिवार गंभीर भूख की स्थिति में पहुंच गए हैं। खान यूनिस, दीर अल बलाह और गाजा शहर में तीव्र कुपोषण की दर अकाल की सीमा को पार कर चुकी है।

 

लाखों लोग विस्थापित, महिलाओं और बच्चों पर बढ़ा खतरा
OCHA के अनुसार, 18 मार्च के बाद से 7.67 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। राहत शिविरों में अत्यधिक भीड़, निजता की कमी और लगातार बिगड़ती परिस्थितियों के कारण महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ लैंगिक हिंसा (GBV) का खतरा भी बढ़ गया है।
दक्षिणी गाजा में स्थिति और अधिक गंभीर बताई गई है, जहां लैंगिक हिंसा से प्रभावित लोगों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल लगभग समाप्त हो चुके हैं।

 

मानवीय सहायता पहुंचाने में बनी हुई हैं चुनौतियां
23 से 29 जुलाई के बीच समन्वित सहायता मिशनों के 92 प्रयासों में से केवल 47 प्रतिशत को ही पूरी तरह अनुमति मिल सकी। लगभग 16 प्रतिशत प्रयासों को अस्वीकार कर दिया गया, जबकि 26 प्रतिशत प्रारंभिक स्वीकृति के बाद भी बाधित हुए।
इजरायली सेना ने 27 जुलाई से अल-मवासी, दीर अल बलाह और गाजा शहर के कुछ क्षेत्रों में प्रतिदिन 10 घंटे तक सैन्य गतिविधियां रोकने की घोषणा की है, ताकि मानवीय सहायता की आपूर्ति बढ़ाई जा सके। इसके साथ ही आटा, चीनी और डिब्बाबंद भोजन की हवाई आपूर्ति, विलवणीकरण संयंत्र के लिए बिजली बहाल करने तथा राहत काफिलों के लिए सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने जैसे कदमों की भी घोषणा की गई है।
हालांकि, मानवीय सहायता एजेंसियों का कहना है कि हवाई मार्ग से सहायता सामग्री गिराना पर्याप्त समाधान नहीं है। इससे सहायता का समान वितरण सुनिश्चित नहीं हो पाता और नागरिकों की सुरक्षा पर भी खतरा बना रहता है।

 

राहत कार्यों पर फंडिंग संकट का असर
संयुक्त राष्ट्र की 2025 मानवीय सहायता अपील के लिए 4 अरब डॉलर की आवश्यकता बताई गई थी, लेकिन 30 जुलाई तक केवल लगभग 21 प्रतिशत धनराशि ही उपलब्ध हो सकी है। पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण राहत अभियान प्रभावित हो रहे हैं और लाखों जरूरतमंद लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाना चुनौती बना हुआ है।

 

संयुक्त राष्ट्र ने की तत्काल कार्रवाई की अपील
संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवीय एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि यदि बड़े स्तर पर राहत अभियान तत्काल शुरू नहीं किया गया तो खाद्य असुरक्षा, कुपोषण और मानवीय संकट और अधिक गंभीर हो सकता है। एजेंसियों ने सभी पक्षों से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति और संघर्ष विराम के प्रयासों को प्राथमिकता देने की अपील की है।

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