12 अरब डॉलर पर नया विवाद: अमेरिका चाहता है किसानों से खरीदारी

अमेरिका चाहता है किसानों से खरीदारी
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Aarohi Chaudhary

Aarohi Chaudhary

0 सेकंड पहले

Aise haalaaton mein diplomatic relations bahut important hote hain.

Kunal Rao

Kunal Rao

0 सेकंड पहले

Yeh global crisis sab ko affect kar sakti hai.

Neel Saxena

Neel Saxena

0 सेकंड पहले

Is khabar ka asar kai deshon par padega.

Nisha Shah

Nisha Shah

0 सेकंड पहले

Aise haalaaton mein diplomatic relations bahut important hote hain.

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अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के बाद संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयास जारी हैं। इसी कड़ी में स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच लगातार दूसरे दिन उच्चस्तरीय वार्ता हुई। हालांकि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है, लेकिन ईरान के फ्रीज किए गए 12 अरब डॉलर के इस्तेमाल को लेकर दोनों देशों के बीच नया विवाद सामने आ गया है।

 

12 अरब डॉलर की रकम पर अलग-अलग दावे
पिछले सप्ताह हुए अंतरिम समझौते के बाद ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर घालिबाफ ने कहा कि दोनों पक्ष 12 अरब डॉलर की फ्रीज की गई राशि जारी करने पर सहमत हो गए हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि यह राशि सीधे ईरान को नहीं दी जाएगी, बल्कि इसका उपयोग अमेरिका से गेहूं, मक्का, सोयाबीन और अन्य कृषि उत्पाद खरीदने के लिए किया जाएगा।

 

ईरान ने अमेरिकी शर्त को किया खारिज
ईरान ने अमेरिका के इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। तेहरान का कहना है कि फ्रीज की गई रकम उसकी संपत्ति है और उसका उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाएगा, इसका निर्णय केवल ईरान करेगा। ईरानी पक्ष किसी भी ऐसी शर्त को मानने के लिए तैयार नहीं है, जिसमें धन के उपयोग पर बाहरी नियंत्रण हो।

 

अमेरिका को किसानों के लिए दिख रहा आर्थिक अवसर
अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि यदि इस राशि से अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदे जाते हैं, तो एक ओर ईरान की खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति होगी और दूसरी ओर अमेरिकी किसानों को बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा। इसी कारण अमेरिका इस मॉडल को समझौते का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रहा है।

 

ईरानी तेल पर 60 दिन की राहत
बातचीत के बीच अमेरिका ने ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर लगी कुछ पाबंदियों में 60 दिनों की अस्थायी ढील देने की घोषणा की है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने इसके लिए एक सामान्य लाइसेंस जारी किया है, जो 21 अगस्त तक प्रभावी रहेगा। इस राहत के बाद भारत सहित कई देशों के लिए ईरानी तेल की खरीद दोबारा संभव हो सकती है।

 

होर्मुज स्ट्रेट और IAEA को लेकर भी बनी सहमति
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के अनुसार, वार्ता के दौरान ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की निर्बाध आवाजाही बनाए रखने का भरोसा दिया है। इसके अलावा ईरान ने संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को दोबारा अपने देश में काम करने की अनुमति देने पर भी सहमति जताई है।

 

स्थायी समझौते की कोशिश जारी
स्विट्जरलैंड में दूसरे दिन की वार्ता के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान के साथ एक स्थायी और व्यापक समझौते तक पहुंचना है। उनके अनुसार अब तक की बातचीत रचनात्मक रही है और दोनों पक्ष कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि 12 अरब डॉलर के उपयोग और व्यापारिक शर्तों पर अंतिम सहमति अभी बनना बाकी है।

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Aarohi Chaudhary

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Aise haalaaton mein diplomatic relations bahut important hote hain.

Kunal Rao

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Yeh global crisis sab ko affect kar sakti hai.

Neel Saxena

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Is khabar ka asar kai deshon par padega.

Nisha Shah

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Aise haalaaton mein diplomatic relations bahut important hote hain.

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