G7 Summit 2026: पीएम मोदी और ट्रंप की अहम मुलाकात
Sneha Menon
0 सेकंड पहलेWorld leaders kya kadam uthayenge? Sabki nazar hai.
Aditya Verma
0 सेकंड पहलेHum sabko milke is global challenge ka samna karna hoga.
फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। इस मुलाकात को वैश्विक राजनीति और भारत-अमेरिका संबंधों के दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है। दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग, वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की।
भारत-अमेरिका संबंधों पर ट्रंप का सकारात्मक संदेश
बैठक के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और अमेरिका के बीच मजबूत होते संबंधों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दोनों देशों के रिश्ते नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। ट्रंप ने भारत को अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया।
भारत की सुरक्षा को लेकर चर्चा में आया ट्रंप का बयान
बैठक के बाद सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने भारत की सुरक्षा के मुद्दे पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत पर किसी प्रकार का हमला होता है, तो अमेरिका भारत के साथ खड़ा रहेगा। इस कथित बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक और राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दिया है।
व्यापार, रक्षा और तकनीकी सहयोग पर फोकस
दोनों नेताओं के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने, रक्षा सहयोग बढ़ाने तथा उभरती तकनीकों में साझेदारी को विस्तार देने पर भी बातचीत हुई। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहे।
वैश्विक चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण
बैठक में आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों सहित कई अंतरराष्ट्रीय विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। दोनों नेताओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों और वैश्विक स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मिला नया बल
विशेषज्ञों का मानना है कि जी7 सम्मेलन के दौरान हुई यह मुलाकात भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग आने वाले समय में वैश्विक शक्ति संतुलन और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी प्रभाव डाल सकता है।





