“संविधान के सम्मान पर कोई समझौता नहीं!”: बाबा साहेब का नाम न लेने पर जताया विरोध
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गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर महाराष्ट्र के नासिक से सामने आई एक घटना ने पूरे देश में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। यह घटना केवल किसी मंत्री के भाषण या किसी नाम के छूट जाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने भारतीय संविधान, उसकी आत्मा और उसके शिल्पकार डॉ. भीमराव अंबेडकर के सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
26 जनवरी का दिन भारत के लिए केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि उस संविधान का उत्सव है जिसने देश के हर नागरिक को समान अधिकार, स्वतंत्रता और गरिमा प्रदान की। ऐसे में इस दिन संविधान निर्माता का उल्लेख न होना कई लोगों को असहज कर गया।
मंत्री के भाषण के बीच महिला कर्मचारी का साहसिक हस्तक्षेप
नासिक में आयोजित आधिकारिक गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री गिरीश महाजन ने झंडा फहराने के बाद अपना संबोधन शुरू किया। भाषण में उन्होंने सरकार की योजनाओं, विकास कार्यों और विभिन्न महापुरुषों का उल्लेख किया।
इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात वन विभाग की महिला कर्मचारी माधवी जाधव ने अचानक साहस दिखाते हुए भाषण के बीच हस्तक्षेप किया। वर्दी में तैनात माधवी जाधव का यह कदम अप्रत्याशित था, लेकिन उनका सवाल बेहद सीधा और गहराई से जुड़ा हुआ था।
“जिस संविधान से हम खड़े हैं, उसके शिल्पकार का नाम क्यों नहीं?”
माधवी जाधव ने मंच के सामने खड़े होकर स्पष्ट शब्दों में पूछा— “जिस संविधान की बदौलत हम आज यहां खड़े हैं, उसके शिल्पकार डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर का नाम आपके भाषण में क्यों नहीं लिया गया?” उनका यह सवाल समारोह स्थल पर मौजूद हर व्यक्ति को सोचने पर मजबूर कर गया। यह केवल एक कर्मचारी की प्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि उस भावना की अभिव्यक्ति थी जो देश के करोड़ों नागरिकों के मन में संविधान और बाबा साहेब अंबेडकर के प्रति सम्मान के रूप में बसी हुई है।
वर्दी में खड़ी इस महिला कर्मचारी का आत्मविश्वास और स्पष्टता देखते ही देखते चर्चा का विषय बन गई।
हिरासत से माफी तक: घटना के बाद मचा हंगामा
घटना के तुरंत बाद प्रशासन हरकत में आया और माधवी जाधव को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद कार्यक्रम स्थल और आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जैसे ही यह खबर सामने आई, सामाजिक संगठनों, कर्मचारी यूनियनों और आम नागरिकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। लोगों का कहना था कि संविधान के सम्मान की बात उठाना कोई अपराध नहीं हो सकता।
विरोध बढ़ता देख और मामला तूल पकड़ता देख मंत्री गिरीश महाजन ने सार्वजनिक रूप से इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे अपनी “अनजाने में हुई भूल” बताया और डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर का नाम न लेने के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी।
बाबा साहेब अंबेडकर के सम्मान का सवाल फिर केंद्र में
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या राष्ट्रीय पर्वों पर संविधान और उसके निर्माता को याद करना केवल औपचारिकता बनकर रह गया है, या फिर यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है?
डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल संविधान के निर्माता ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और लोकतंत्र के प्रतीक हैं। ऐसे में गणतंत्र दिवस जैसे अवसर पर उनका उल्लेख न होना कई लोगों के लिए पीड़ा का कारण बन गया।
एक सवाल, जो देशभर में गूंज गया
माधवी जाधव का यह साहसिक कदम अब केवल नासिक तक सीमित नहीं रहा। यह घटना सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बन चुकी है। कई लोग इसे संविधान के सम्मान की रक्षा के लिए उठाई गई आवाज़ बता रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संविधान और उसके मूल्यों के प्रति जागरूकता आज भी आम नागरिकों के भीतर जीवित है—और जब बात सम्मान की आती है, तो एक साधारण कर्मचारी भी सत्ता से सवाल पूछने का साहस रखता है।







