RBI ला सकता है पॉलीमर नोट: क्या बदल जाएगा भारतीय करेंसी का भविष्य

Yash Kulkarni
0 सेकंड पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Aryan Malhotra
0 सेकंड पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
भारत में जल्द ही करेंसी नोटों का स्वरूप बदल सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में बढ़ती नकदी की मांग और नोटों की छपाई पर बढ़ते खर्च को देखते हुए पॉलीमर यानी प्लास्टिक नोटों को प्रचलन में लाने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, RBI बोर्ड की हालिया बैठकों में इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई है और आने वाले समय में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफल रहती है तो भारतीय करेंसी प्रणाली में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
पॉलीमर नोट क्या हैं और क्यों हैं खास?
पॉलीमर नोट विशेष प्रकार के प्लास्टिक पदार्थ से बनाए जाते हैं, जो पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और टिकाऊ होते हैं। ये नोट पानी, नमी, धूल और फटने जैसी समस्याओं से काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं। दुनिया के कई देशों में पहले से ही पॉलीमर करेंसी का इस्तेमाल किया जा रहा है क्योंकि इनकी उम्र सामान्य कागजी नोटों की तुलना में लगभग चार गुना अधिक होती है।
नोटों की छपाई पर बढ़ रहा है भारी खर्च
RBI के सामने सबसे बड़ी चुनौती तेजी से खराब हो रहे नोटों को बदलने की है। वित्त वर्ष 2024-25 में देशभर में 23.8 अरब से अधिक खराब और अनुपयोगी नोट नष्ट किए गए। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है।
वहीं, नोटों की छपाई पर होने वाला खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में मुद्रा मुद्रण पर लगभग ₹6,372.8 करोड़ खर्च किए गए, जो पिछले वर्ष के मुकाबले काफी ज्यादा है। ऐसे में पॉलीमर नोटों को लंबे समय का किफायती समाधान माना जा रहा है।
नकली नोटों पर भी लगेगी लगाम
पॉलीमर नोटों की सबसे बड़ी खासियत उनकी उन्नत सुरक्षा तकनीक है। इनमें विशेष सुरक्षा फीचर्स, पारदर्शी विंडो और आधुनिक डिजाइन जोड़े जा सकते हैं, जिससे नकली नोटों की पहचान आसान हो जाती है और जालसाजी की संभावना कम होती है।
यही कारण है कि कई देशों ने नकली मुद्रा पर नियंत्रण के लिए पॉलीमर करेंसी को अपनाया है।
डिजिटल भुगतान बढ़ा, फिर भी नकदी की मांग कायम
देश में UPI और डिजिटल भुगतान के विस्तार के बावजूद नकदी की मांग लगातार बढ़ रही है। 15 मई तक बाजार में प्रचलित कुल नकदी (Currency in Circulation) बढ़कर लगभग ₹42.86 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। विशेष रूप से ₹10 और ₹20 जैसे छोटे मूल्यवर्ग के नोटों की मांग लगातार बनी हुई है, जिसके कारण RBI को अधिक टिकाऊ विकल्पों की तलाश करनी पड़ रही है।
₹10 और ₹20 के नोटों से हो सकती है शुरुआत
रिपोर्ट्स के अनुसार, RBI शुरुआत में ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर सकता है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो भविष्य में ₹100, ₹200 और ₹500 के नोट भी पॉलीमर स्वरूप में जारी किए जा सकते हैं।
हालांकि, केंद्रीय बैंक की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
2012 में भी हुआ था प्लास्टिक नोटों का परीक्षण
भारत में पॉलीमर नोटों का विचार नया नहीं है। वर्ष 2012 में तत्कालीन सरकार ने कुछ चुनिंदा शहरों में 10 रुपये के प्लास्टिक नोटों का परीक्षण शुरू करने की योजना बनाई थी। लेकिन उस समय एटीएम और बैंकिंग ढांचे में तकनीकी चुनौतियों के कारण यह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब तकनीक में हुए बड़े बदलाव और आधुनिक एटीएम नेटवर्क के चलते इस योजना को फिर से गति मिलने की संभावना है।
अगर योजना सफल हुई तो बदल जाएगा भारतीय करेंसी का लुक
विशेषज्ञों का मानना है कि पॉलीमर नोटों के सफल परीक्षण के बाद भारत की करेंसी प्रणाली अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और किफायती बन सकती है। इससे नोटों को बार-बार छापने और नष्ट करने की आवश्यकता कम होगी, साथ ही नकली नोटों की समस्या पर भी प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा।







