DU के महिला हॉस्टल में छात्राओं का फूटा गुस्सा: रातभर चला धरना
Sonu rai
0 सेकंड पहलेNishpaksh patrakarita ke liye dhanyawad.
Arjun Singh
0 सेकंड पहलेSach dikhane ka shukriya, aisi journalism chahiye.
Sai Mehta
0 सेकंड पहलेBreaking news! Sabko is baare mein pata hona chahiye.
दिल्ली विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी हॉस्टल फॉर वूमेन (UHW) में छात्राओं का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। देर रात तक चले विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्राएं हॉस्टल परिसर के बाहर धरने पर बैठीं और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। छात्राओं का आरोप है कि उन पर जबरन हॉस्टल खाली कराने का दबाव बनाया जा रहा है।
पानी सप्लाई बंद और रीडिंग रूम की कुर्सियां हटाने का आरोप
प्रदर्शन कर रहीं छात्राओं ने दावा किया कि हॉस्टल के दो ब्लॉकों में कई दिनों से पानी की सप्लाई बंद कर दी गई है। इसके अलावा रीडिंग रूम से कुर्सियां भी हटा दी गईं, जिससे पढ़ाई करने में भारी परेशानी हो रही है। छात्राओं का कहना है कि इस समय सेमेस्टर परीक्षाएं और NET की तैयारी चल रही है, ऐसे में प्रशासन की यह कार्रवाई उन्हें मानसिक रूप से परेशान करने वाली है।
“मानसिक दबाव बनाकर हॉस्टल खाली कराया जा रहा”
छात्राओं का कहना है कि प्रशासन लगातार ऐसा माहौल बना रहा है जिससे वे खुद हॉस्टल छोड़ने को मजबूर हो जाएं। उनका आरोप है कि पानी जैसी बुनियादी सुविधा बंद करना और पढ़ाई की व्यवस्था खराब करना किसी भी छात्रा के लिए बेहद कठिन स्थिति पैदा करता है। छात्राओं ने यह भी कहा कि जून और जुलाई तक की हॉस्टल फीस पहले ही जमा कर दी गई है, बावजूद इसके मई महीने में हॉस्टल खाली करने का दबाव बनाया जा रहा है।
450 रुपये प्रतिदिन अतिरिक्त शुल्क से बढ़ा विवाद
मामला तब और गंभीर हो गया जब प्रशासन की ओर से यह आदेश जारी किया गया कि तय समय के बाद हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को 450 रुपये प्रतिदिन अतिरिक्त शुल्क देना होगा। छात्राओं और छात्र संगठन AISA ने इसे “जबरन वसूली” बताया है। उनका कहना है कि एक तरफ सुविधाएं नहीं दी जा रहीं और दूसरी तरफ अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है।
16 मई को मिला था आश्वासन, फिर बदला फैसला
छात्राओं ने बताया कि 16 मई को भी इसी मुद्दे पर प्रदर्शन हुआ था। उस समय हॉस्टल प्रोवोस्ट ने मौखिक रूप से भरोसा दिया था कि पानी और अन्य सुविधाएं जल्द बहाल कर दी जाएंगी और छात्राओं को कुछ समय तक रहने दिया जाएगा। लेकिन बाद में प्रशासन अपने वादे से पीछे हट गया, जिससे छात्राओं में नाराजगी और बढ़ गई।
AISA ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
छात्र संगठन AISA ने भी छात्राओं के आंदोलन का समर्थन किया है। संगठन ने आरोप लगाया कि दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन छात्राओं की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है और हॉस्टल में जबरन बेदखली का माहौल बनाया जा रहा है। AISA ने UHW प्रोवोस्ट के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि छात्राओं के साथ हो रहा व्यवहार पूरी तरह अस्वीकार्य है।
रातभर चले धरने के बाद प्रशासन झुका
रातभर चले विरोध प्रदर्शन के बाद आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा। प्रशासन ने लिखित आदेश जारी कर छात्राओं को 30 जून 2026 तक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के हॉस्टल में रहने की अनुमति दे दी। साथ ही रीडिंग रूम में कुर्सियां बहाल करने और मेस में कूलर जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया।
छात्राओं ने इसे “अधिकारों की लड़ाई” बताया
प्रदर्शन में शामिल कई छात्राओं ने कहा कि यह केवल हॉस्टल का मुद्दा नहीं बल्कि सम्मान और बुनियादी अधिकारों की लड़ाई है। सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है। कई लोग छात्राओं के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं और विश्वविद्यालय प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान निकालने की मांग कर रहे हैं।
DU हॉस्टल विवाद पर सोशल मीडिया में भी बहस तेज
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में छात्राएं बेहतर सुविधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही की मांग करती नजर आ रही हैं। इंटरनेट यूजर्स इस मुद्दे पर लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोग इसे छात्रों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बता रहे हैं, जबकि कई यूजर्स प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं।


