भोपाल में विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन पर लगी मुह: बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलने की दिशा में बड़ा कदम

Pooja Reddy
0 सेकंड पहलेYeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.
Krishna Yadav
0 सेकंड पहलेYeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.
Anika Rajput
0 सेकंड पहलेYeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.
Payal jadon
0 सेकंड पहलेYeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.
भोपाल स्थित प्रतिष्ठित बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन की प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद (Executive Council) ने सर्वसम्मति से संस्थान का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब यह प्रस्ताव अंतिम स्वीकृति के लिए राज्य शासन, उच्च शिक्षा विभाग और राजभवन को भेजा जाएगा। शासन की मंजूरी मिलने के बाद ही नाम परिवर्तन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी हो सकेगी।
राजा भोज की सांस्कृतिक और शैक्षिक विरासत का दिया गया हवाला
कार्यपरिषद की बैठक में राजा भोज के ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान, ज्ञान परंपरा और भोपाल क्षेत्र के इतिहास में राजा भोज का विशेष स्थान रहा है। इसी कारण विश्वविद्यालय को उनकी विरासत से जोड़ते हुए नई पहचान देने की पहल की गई है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, ‘वाग्देवी’ ज्ञान, कला और बुद्धि की देवी मां सरस्वती का प्रतीक है, जबकि ‘भोजपाल’ शब्द भोपाल के प्राचीन इतिहास और राजा भोज के शासनकाल से जुड़ा हुआ माना जाता है।
कौन थे मौलाना बरकतउल्लाह भोपाली?
बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का वर्तमान नाम महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मौलाना बरकतउल्लाह भोपाली के सम्मान में रखा गया था। उनका जन्म 7 जुलाई 1854 को भोपाल में हुआ था। वे एक प्रखर राष्ट्रवादी, क्रांतिकारी, पत्रकार और बहुभाषाविद थे। भारत की स्वतंत्रता के लिए उन्होंने विदेशों में रहकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया।
साल 1915 में अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में गठित भारत की पहली निर्वासित (Provisional) सरकार में उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था। स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को सम्मान देते हुए वर्ष 1988 में भोपाल विश्वविद्यालय का नाम बदलकर बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय रखा गया था।
1970 में हुई थी विश्वविद्यालय की स्थापना
इस विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1970 में भोपाल विश्वविद्यालय के रूप में हुई थी। लगभग 18 वर्षों तक इसी नाम से संचालित होने के बाद 1988 में इसे मौलाना बरकतउल्लाह के नाम पर समर्पित किया गया। अब करीब चार दशक बाद फिर से इसके नाम परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हुई है, जिसने शिक्षा और इतिहास से जुड़े हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
अरबी और पर्शियन विभागों का होगा पुनर्गठन
कार्यपरिषद की बैठक में केवल नाम परिवर्तन ही नहीं, बल्कि कई शैक्षणिक फैसले भी लिए गए। अरबी और पर्शियन विभागों को पुनर्गठित कर तुलनात्मक भाषा एवं संस्कृति विभाग के अंतर्गत लाने का निर्णय लिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इससे भाषाई अध्ययन और शोध गतिविधियों को नया आयाम मिलेगा तथा अकादमिक समन्वय बेहतर होगा।
बीएड कॉलेजों पर प्रशासन की सख्ती
बैठक में बीएड कॉलेजों के निरीक्षण के दौरान सामने आई अनियमितताओं पर भी चर्चा हुई। करीब 30 कॉलेजों में कमियां मिलने के बाद संबंधित संस्थानों को नोटिस जारी करने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गुणवत्ता और नियमों के पालन को लेकर भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
नाम परिवर्तन पर शुरू हुई नई बहस
विश्वविद्यालय का नाम बदलने के प्रस्ताव ने राज्य में ऐतिहासिक विरासत, स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के सम्मान और सांस्कृतिक पहचान को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है। एक पक्ष इसे भारतीय ज्ञान परंपरा और राजा भोज की विरासत से जोड़ने का प्रयास मान रहा है, जबकि दूसरा पक्ष मौलाना बरकतउल्लाह जैसे स्वतंत्रता सेनानी के योगदान को संरक्षित रखने की बात कर रहा है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और राजभवन के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।





