ऐतिहासिक उड़ान: 50 साल बाद इंसान की चांद पर वापसी की तैयारी

50 साल बाद इंसान की चांद पर वापसी की तैयारी
Reactions

No comments yet

Be the first to share your thoughts

करीब 5 दशक बाद अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने ‘आर्टेमिस-II’ मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की ओर रवाना किया है। भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह 4:05 बजे फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से SLS (स्पेस लॉन्च सिस्टम) रॉकेट ने जोरदार गर्जना के साथ उड़ान भरी।
यह मिशन 1972 में हुए अपोलो-17 के बाद पहला मानवयुक्त मिशन है, जो पृथ्वी की निचली कक्षा से बाहर जाकर चांद के करीब पहुंचेगा।

कौन हैं मिशन के 4 अंतरिक्ष यात्री?
इस ऐतिहासिक मिशन में चार अनुभवी अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं:
रीड वाइजमैन – कमांडर,
विक्टर ग्लोवर – पायलट (पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री जो चांद के करीब जाएंगे),
क्रिस्टीना कोच – मिशन स्पेशलिस्ट (सबसे लंबा स्पेस मिशन करने वाली महिला),
जेरेमी हैनसेन – मिशन स्पेशलिस्ट (कनाडा के पहले अंतरिक्ष यात्री जो चांद तक पहुंचेंगे),
मिशन से पहले सभी ने भावुक संदेश देते हुए कहा—"हम पूरी मानवता के लिए यह यात्रा कर रहे हैं।"

लॉन्च से पहले तकनीकी चुनौतियां
लॉन्च से ठीक पहले ‘लॉन्च अबॉर्ट सिस्टम’ में तकनीकी खराबी सामने आई, जिससे मिशन पर खतरा मंडरा गया था। लेकिन इंजीनियरों ने तेजी से समस्या को ठीक किया और काउंटडाउन को थोड़ी देर रोकने के बाद फिर शुरू किया गया। उड़ान के करीब 51 मिनट बाद संचार में भी अस्थायी रुकावट आई, लेकिन इसे भी तुरंत ठीक कर लिया गया।

मिशन का मकसद: भविष्य की तैयारी
आर्टेमिस-II का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष में इंसानों के रहने के लिए जरूरी ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ की जांच करना है। यह मिशन चांद की सतह पर नहीं उतरेगा, बल्कि उसकी परिक्रमा करके वापस पृथ्वी पर लौटेगा।
कुल दूरी: लगभग 11 लाख किलोमीटर,
अवधि: 10 दिन,
लक्ष्य: चांद के आसपास उड़ान और सिस्टम टेस्ट,

आर्टेमिस प्रोग्राम: चांद से मंगल तक का सफर
आर्टेमिस मिशन सिर्फ चांद तक पहुंचने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह भविष्य में चांद पर स्थायी बेस बनाने और मंगल मिशन की तैयारी का हिस्सा है।
आर्टेमिस-III: चांद पर पहली महिला को उतारने की योजना,
आर्टेमिस-IV: 2028 तक चंद्र सतह पर मानव वापसी,
लक्ष्य: चांद को ‘टेस्टिंग ग्राउंड’ बनाकर मंगल तक पहुंचना,

क्यों जरूरी है चांद पर वापसी?
वैज्ञानिकों के अनुसार चांद सिर्फ बंजर जमीन नहीं है, बल्कि संसाधनों का खजाना है:
रेयर अर्थ एलिमेंट्स (दुर्लभ धातुएं),
हीलियम और टाइटेनियम,
ध्रुवीय क्षेत्रों में पानी (बर्फ के रूप में),
यह पानी भविष्य में ईंधन, ऑक्सीजन और पीने के लिए इस्तेमाल हो सकता है—जो अंतरिक्ष में जीवन के लिए बेहद जरूरी है।

ओरियन स्पेसक्राफ्ट: आधुनिक तकनीक से लैस
आर्टेमिस-II में इस्तेमाल किया गया ‘ओरियन कैप्सूल’ अपोलो मिशन के मुकाबले कहीं ज्यादा एडवांस है:
50% ज्यादा जगह,
हाई-टेक लाइफ सपोर्ट सिस्टम,
20,000 गुना तेज कंप्यूटर प्रोसेसिंग,
सोलर पैनल से बिजली,
आधुनिक टॉयलेट और फिटनेस सिस्टम,

प्रेरणा और भविष्य
यह मिशन सिर्फ वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा भी है। नासा इस मिशन के जरिए दुनिया को दिखाना चाहता है कि इंसान मिलकर बड़े लक्ष्य हासिल कर सकता है।

नॉलेज पॉइंट
अब तक सिर्फ 24 लोग ही चांद तक पहुंचे हैं, सभी अपोलो मिशन (1968–1972) के दौरान आर्टेमिस प्रोग्राम पर अब तक लगभग 93 अरब डॉलर खर्च '

लाइव कवरेज
इस मिशन को दुनिया भर में नासा के यूट्यूब चैनल और NASA+ प्लेटफॉर्म पर लाइव देखा जा सकता है।

Reactions

No comments yet

Be the first to share your thoughts

खबरे और भी है...