भोपाल में फुटपाथ बना ‘पिंजरा’: 90 डिग्री ब्रिज के बाद अब रेलिंग से घिरा वॉकवे बना विवाद का कारण

90 डिग्री ब्रिज के बाद अब रेलिंग से घिरा वॉकवे बना विवाद का कारण
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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर अपने एक निर्माण कार्य को लेकर सुर्खियों में है। ऐशबाग के चर्चित 90 डिग्री रेलवे ओवरब्रिज के बाद अब वार्ड-32 स्थित पीएंडटी चौराहे पर बनाया गया फुटपाथ विवादों में घिर गया है। सौंदर्यीकरण परियोजना के तहत बनाए गए इस फुटपाथ के चारों ओर ऊंची लोहे की रेलिंग लगा दी गई है, जिससे पैदल यात्रियों के लिए उस तक पहुंचना ही चुनौती बन गया है।

 

फुटपाथ बना लेकिन पहुंचने का रास्ता नहीं
स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि फुटपाथ के किनारे करीब तीन फीट ऊंची लोहे की फेंसिंग लगा दी गई है। कई स्थानों पर रेलिंग के साथ पहले से मौजूद पक्की दीवार भी है, जिससे पूरा फुटपाथ चारों ओर से घिरा हुआ दिखाई देता है। लोगों का कहना है कि कई हिस्सों में फुटपाथ पर चढ़ने या उतरने के लिए पर्याप्त प्रवेश मार्ग नहीं छोड़े गए हैं, जिसके कारण राहगीरों को सड़क पर चलना पड़ रहा है।

 

बस यात्रियों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी
सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने वाले यात्रियों को सबसे अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। बस या अन्य वाहनों से उतरने के बाद फुटपाथ तक पहुंचने का कोई सीधा रास्ता नहीं है। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए यह स्थिति और भी असुविधाजनक हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा के लिए बनाया गया ढांचा अब पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए ही खतरा बन रहा है।

 

सौंदर्यीकरण के नाम पर सुविधा से समझौता?
रहवासियों ने सवाल उठाया है कि जब फुटपाथ का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित और सुगम पैदल मार्ग उपलब्ध कराना है, तो फिर उसके चारों ओर ऐसी बाधाएं क्यों खड़ी की गईं। लोगों का मानना है कि डिजाइन तैयार करते समय जमीनी परिस्थितियों और आम नागरिकों की जरूरतों का सही आकलन नहीं किया गया।

 

अतिक्रमण और असामाजिक गतिविधियों को रोकने का था उद्देश्य
क्षेत्रीय पार्षद आरती अनेजा के अनुसार, इस इलाके में अतिक्रमण, शराबियों के जमावड़े और असामाजिक गतिविधियों की शिकायतें मिल रही थीं। स्थानीय नागरिकों की मांग पर रेलिंग लगाने का निर्णय लिया गया था। हालांकि उन्होंने माना कि यदि फुटपाथ का उपयोग करने में लोगों को परेशानी हो रही है तो डिजाइन में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।

 

नगर निगम ने शुरू की जांच
नगर निगम के कार्यपालन यंत्री एनके डेहरिया ने कहा है कि मामले की शिकायत प्राप्त हुई है और इसकी जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि इंजीनियरिंग टीम से निर्माण की स्वीकृति और प्रक्रिया संबंधी जानकारी मांगी गई है। यदि निरीक्षण में यह पाया जाता है कि फुटपाथ का उपयोग प्रभावित हो रहा है, तो आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।

 

कट पॉइंट भी बने बेअसर
फुटपाथ में कुछ स्थानों पर प्रवेश और निकास के लिए कट पॉइंट बनाए गए हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि इन स्थानों पर ठेले और अतिक्रमण होने के कारण उनका उपयोग भी संभव नहीं है। इससे पैदल यात्रियों को सड़क पर चलना पड़ रहा है और दुर्घटना का खतरा बढ़ रहा है।

 

फुटपाथ के नियम क्या कहते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार रिहायशी क्षेत्रों में फुटपाथ की न्यूनतम चौड़ाई 1.8 मीटर होनी चाहिए, जबकि व्यावसायिक और अधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में यह कम से कम 2.5 मीटर होनी चाहिए। साथ ही फुटपाथ तक पहुंच आसान और बाधारहित होना जरूरी माना जाता है। वर्तमान स्थिति में पीएंडटी चौराहे का फुटपाथ इन मानकों को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है।

 

90 डिग्री ब्रिज के बाद फिर उठे इंजीनियरिंग पर सवाल
भोपाल का 90 डिग्री रेलवे ओवरब्रिज पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है। अब फुटपाथ के इस विवाद ने शहर में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, डिजाइन और योजना प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है। नागरिकों का कहना है कि विकास कार्यों में केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि उपयोगिता और जनसुविधा को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

 

लोगों की मांग
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि रेलिंग के बीच पर्याप्त प्रवेश द्वार बनाए जाएं, अतिक्रमण हटाया जाए और फुटपाथ को वास्तव में पैदल यात्रियों के उपयोग योग्य बनाया जाए। लोगों का कहना है कि सरकारी धन से बने ऐसे ढांचों का लाभ तभी है जब आम नागरिक उनका आसानी से उपयोग कर सकें।

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