FATF के उपाध्यक्ष बने विवेक अग्रवाल: वैश्विक वित्तीय सुरक्षा में भारत की बढ़ी ताकत

वैश्विक वित्तीय सुरक्षा में भारत की बढ़ी ताकत
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Saanvi Pandey

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Jai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.

Payal jadon

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भारत ने वैश्विक वित्तीय सुरक्षा और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) का उपाध्यक्ष चुना गया है। यह पहली बार है जब किसी भारतीय अधिकारी को इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्था में उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 

क्या है FATF और क्यों है इसका महत्व?
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) दुनिया की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जो मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद के वित्तपोषण और अवैध वित्तीय गतिविधियों पर निगरानी रखती है। यह संस्था सदस्य देशों के लिए ऐसे मानक और नियम निर्धारित करती है, जिनका उद्देश्य वैश्विक वित्तीय प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।

 

जुलाई 2026 से संभालेंगे नई जिम्मेदारी
पेरिस में आयोजित FATF की प्लेनरी बैठक में विवेक अग्रवाल को वर्ष 2026-27 के लिए संस्था का उपाध्यक्ष चुना गया। वह 1 जुलाई 2026 से यूनाइटेड किंगडम के गाइल्स थॉमसन का स्थान लेंगे और जून 2027 तक इस महत्वपूर्ण पद पर कार्य करेंगे।

 

कौन हैं विवेक अग्रवाल?
विवेक अग्रवाल मध्य प्रदेश कैडर के 1994 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं। वर्तमान में वह भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय में सचिव के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले वह वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग में अतिरिक्त सचिव और फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया (FIU-IND) के निदेशक के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। FATF में भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने का उनका अनुभव उन्हें इस भूमिका के लिए और अधिक सक्षम बनाता है।

 

भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को मिली वैश्विक मान्यता
विदेश मंत्रालय ने इस नियुक्ति को भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया है। मंत्रालय के अनुसार, आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और अवैध वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई के प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। यह नियुक्ति वैश्विक आतंकवादी फंडिंग नेटवर्क के खिलाफ भारत की भूमिका को और मजबूत करेगी।

 

वैश्विक वित्तीय अखंडता को मिलेगी नई दिशा
विवेक अग्रवाल ने अपनी नियुक्ति पर कहा कि यह सम्मान भारत की सामूहिक कोशिशों और मनी लॉन्ड्रिंग तथा आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने वाले मजबूत तंत्र की पहचान है। उन्होंने कहा कि FATF के वैश्विक नेटवर्क के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली को अधिक सुरक्षित, समावेशी और मजबूत बनाने के लिए वह उत्साहित हैं।

 

डिजिटल वित्तीय चुनौतियों में बढ़ेगी भारत की भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल पेमेंट, वर्चुअल एसेट्स, क्रिप्टोकरेंसी और नए वित्तीय जोखिमों से जुड़े वैश्विक नियमों के निर्माण में भारत की भूमिका अब और प्रभावशाली होगी। FATF में यह जिम्मेदारी भारत को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नीतियों के निर्माण में अधिक सक्रिय भागीदारी का अवसर प्रदान करेगी।

 

आतंकवाद की फंडिंग पर भारत का सख्त रुख
हाल के वर्षों में भारत लगातार आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ वैश्विक मंचों पर आवाज उठाता रहा है। FATF द्वारा जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले की निंदा और आतंक वित्तपोषण रोकने की अपील के बाद भारत ने भी सीमा पार आतंकवाद को लेकर अपना रुख और स्पष्ट किया था। ऐसे समय में FATF के शीर्ष नेतृत्व में भारत की भागीदारी को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

भारत की बढ़ती वैश्विक विश्वसनीयता का प्रतीक
FATF के उपाध्यक्ष पद पर विवेक अग्रवाल का चयन इस बात का संकेत है कि वित्तीय पारदर्शिता, मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी तंत्र और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ कार्रवाई में भारत की विश्वसनीयता लगातार बढ़ रही है। यह उपलब्धि वैश्विक वित्तीय सुरक्षा व्यवस्था में भारत के बढ़ते प्रभाव और नेतृत्व क्षमता को भी दर्शाती है।

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