भोजपुर एनकाउंटर पर बढ़ा विवाद: भरत भूषण तिवारी की मौत
Ritika Ghosh
0 सेकंड पहलेIska aage kya hoga? Koi update milega kya?
Dev Kapoor
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भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत के बाद मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो, पुराने विवादों और पुलिस कार्रवाई को लेकर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। परिजन और ग्रामीण जहां इस घटना को संदिग्ध बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं पुलिस का दावा है कि पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में और आत्मरक्षा में की गई।
एनकाउंटर के बाद वायरल हुआ अंतिम फेसबुक लाइव
भरत भूषण तिवारी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय बताए जाते थे और अक्सर फेसबुक लाइव के जरिए अपनी बातें साझा करते थे। घटना वाले दिन भी उन्होंने कई फेसबुक लाइव किए थे। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में वह पुलिस से घिरे दिखाई देते हैं और कथित रूप से अपना हथियार जमीन पर फेंकते नजर आते हैं। इसके बाद लाइव प्रसारण समाप्त हो जाता है।
यही वीडियो अब पूरे मामले में बहस का केंद्र बन गया है। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और इसकी सत्यता की जांच अभी आधिकारिक स्तर पर नहीं हुई है।
पुलिस का दावा: फायरिंग के जवाब में की गई कार्रवाई
पुलिस के अनुसार 17 जून को सूचना मिली थी कि भरत भूषण तिवारी गांव में हथियार लहराते हुए घूम रहे हैं और फायरिंग कर रहे हैं। इसके बाद पुलिस और एसटीएफ की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों का कहना है कि भरत को कई बार आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग जारी रखी।
पुलिस का दावा है कि आत्मरक्षा और आम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जवाबी कार्रवाई की गई, जिसमें भरत के पैरों में गोली लगी। बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
परिजनों ने उठाए फर्जी एनकाउंटर के आरोप
मृतक के परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि भरत ने हथियार छोड़ दिया था, इसके बावजूद उसे गोली मारी गई। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो और स्थानीय लोगों के बयान पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं।
परिजनों ने इस मामले की न्यायिक जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
एक साल पुराने विवाद की फिर हो रही चर्चा
भरत भूषण तिवारी और स्थानीय पुलिस के बीच पहले भी विवाद सामने आ चुका था। मार्च 2025 में शाहपुर थाना में पदस्थापित दारोगा रामाशंकर बैठा के आवेदन पर भरत के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, मारपीट, धमकी और पुलिस अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार समेत विभिन्न आरोपों में मामला दर्ज किया गया था।
पुलिस का आरोप था कि जमीन विवाद की जांच के दौरान भरत ने पुलिस अधिकारी का कॉलर पकड़कर धक्का-मुक्की की थी। एनकाउंटर के बाद यह पुराना मामला भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
पिता और भाई को भी बनाया गया आरोपी
पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी में भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी आरोपित बनाया गया है। पुलिस का आरोप है कि उन्हें भरत के पास मौजूद अवैध हथियार की जानकारी थी और वे उसे संरक्षण दे रहे थे। हालांकि परिवार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सड़क जाम और विरोध प्रदर्शन पर भी कार्रवाई
भरत तिवारी की मौत के बाद गांव में भारी विरोध प्रदर्शन हुआ। पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचने पर आरा-बक्सर एनएच-922 को कई घंटों तक जाम रखा गया। इस मामले में भी पुलिस ने अलग प्राथमिकी दर्ज करते हुए कई लोगों को नामजद किया है। इसी बीच आरा शहर में बड़ी संख्या में लोगों ने कैंडल मार्च निकालकर निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने मामले की पारदर्शी जांच कराने की मांग दोहराई।
जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं निगाहें
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में फिलहाल पुलिस और परिजनों के दावे आमने-सामने हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो, दर्ज एफआईआर और विरोध प्रदर्शनों के बीच यह मामला संवेदनशील बन गया है। घटना की वास्तविक परिस्थितियों और सभी तथ्यों का स्पष्ट खुलासा केवल आधिकारिक जांच, कानूनी प्रक्रिया और संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगा।




