बारिश में डूबा शहडोल, व्यवस्था भी बह गई!": सड़क या तालाब? बारिश ने खोली व्यवस्था की पोल!"

सड़क या तालाब? बारिश ने खोली व्यवस्था की पोल!"
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तीन-चार दिनों की लगातार बारिश ने खोली व्यवस्थाओं की पोल, बुढार चौक, गांधी चौक, पटेल नगर समेत कई इलाकों में जलभराव से लोग बेहाल

 मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में पिछले तीन से चार दिनों से लगातार हो रही बारिश ने नगर पालिका की तैयारियों की हकीकत सामने ला दी है। शहर के प्रमुख चौराहों और रिहायशी इलाकों में बारिश का पानी इस तरह जमा हो गया है कि सड़कें तालाब जैसी नजर आने लगी हैं। बुढार चौक, गांधी चौक, पटेल नगर सहित कई क्षेत्रों में जलभराव के कारण लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया है।

 

बारिश का पानी सड़कों पर कई फीट तक जमा है। दोपहिया वाहन चालक जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं, जबकि चारपहिया वाहन भी पानी के बीच धीरे-धीरे निकल रहे हैं। कई जगह वाहन बंद होने की भी शिकायतें सामने आ रही हैं। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है।

 

सड़क है या नाली, पहचानना हुआ मुश्किल

लगातार बारिश और जाम नालियों के कारण पानी पूरी सड़क पर फैल गया है। हालात ऐसे हैं कि कई जगह यह समझना मुश्किल हो गया है कि सड़क कहां है और नाली कहां। गड्ढों में भरा पानी दिखाई नहीं देता, जिससे बाइक सवार फिसल रहे हैं और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है।

 

हर बारिश में वही कहानी, फिर भी नहीं हुआ स्थायी समाधान

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के मौसम में यही स्थिति बनती है। नालियों की समय पर सफाई नहीं होने और जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने से थोड़ी सी तेज बारिश में भी शहर की सड़कें जलमग्न हो जाती हैं। लोगों का आरोप है कि हर वर्ष दावे तो बड़े किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने रहते हैं।

 

मौसम सुहाना, लेकिन मुश्किलें भी बढ़ीं

लगातार हो रही बारिश से मौसम जरूर सुहाना हो गया है और लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है, लेकिन शहर की बदहाल सड़कें और जलभराव आम नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी बन गए हैं। बाजार आने-जाने वाले लोगों, व्यापारियों और वाहन चालकों को रोजाना घंटों जाम और जलभराव का सामना करना पड़ रहा है।

 

लोगों ने प्रशासन से की मांग

शहरवासियों ने जिला प्रशासन और नगर पालिका से मांग की है कि जलभराव वाले क्षेत्रों से तत्काल पानी निकाला जाए, जाम नालियों की सफाई कराई जाए और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कराई जाए। लोगों का कहना है कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

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