भारत में डेटा लीक हुआ और महंगा: औसत नुकसान ₹25.50 करोड़भारत में बढ़ते डिजिटल इस्तेमाल के साथ साइबर हमलों और डेटा लीक का आर्थिक खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। IBM की 2026 Cost of a Data Breach Report के अनुसार भारत में एक डेटा ब्रीच की औसत लागत बढ़कर करीब ₹25.50 करोड़ पहुंच गई है। यह पिछले वर्ष की करीब ₹22 करोड़ की औसत लागत से 15.9 प्रतिशत अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक डेटा लीक की घटनाओं में केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं बढ़ रहा, बल्कि प्रत्येक घटना में प्रभावित रिकॉर्ड की संख्या भी बढ़ी है। भारत में एक डेटा ब्रीच में औसतन करीब 39,500 रिकॉर्ड प्रभावित हुए, जबकि 2025 में यह आंकड़ा करीब 38,200 रिकॉर्ड था। IBM की वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार AI-enabled malicious breaches भी तेजी से बढ़े हैं। AI बना साइबर सुरक्षा के लिए दोधारी तलवार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में दोधारी तलवार बनता जा रहा है। एक तरफ साइबर अपराधी AI की मदद से हमलों को अधिक तेज और प्रभावी बना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कंपनियां AI और ऑटोमेशन का इस्तेमाल साइबर हमलों का पता लगाने और नुकसान कम करने के लिए कर रही हैं। भारत से जुड़े आंकड़ों में AI-enabled attacks की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत बताई गई है। इसका मतलब है कि AI अब केवल कारोबार और उत्पादकता बढ़ाने की तकनीक नहीं रह गया है, बल्कि साइबर अपराध के बदलते तौर-तरीकों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। IBM के अनुसार वैश्विक स्तर पर लगभग चार में से एक malicious breach AI-enabled था और ऐसे हमलों की संख्या पिछले साल की तुलना में 56 प्रतिशत बढ़ी। सिर्फ 32% कंपनियां कर रहीं AI और सिक्योरिटी ऑटोमेशन का व्यापक इस्तेमाल रिपोर्ट के अनुसार भारत में केवल 32 प्रतिशत संगठन AI और सिक्योरिटी ऑटोमेशन का व्यापक उपयोग कर रहे हैं। वहीं करीब 36 प्रतिशत कंपनियों ने सीमित इस्तेमाल की जानकारी दी, जबकि शेष कंपनियों में इन तकनीकों का उपयोग नहीं हो रहा है। यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जिन कंपनियों ने AI और सिक्योरिटी ऑटोमेशन को सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किया, उन्हें डेटा ब्रीच के बाद अपेक्षाकृत कम आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।