Meta को सरकार का सख्त नोटिस: Instagram पर आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के आदेश

Yash Kulkarni
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Ritika Ghosh
0 सेकंड पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta को सख्त नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े कंटेंट (CSEAM) के प्रसार को लेकर की गई है।सरकार ने इस तरह की सामग्री को गंभीर अपराध मानते हुए तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
आपत्तिजनक कंटेंट तुरंत हटाने का निर्देश
नोटिस में Meta को निर्देश दिया गया है कि इंस्टाग्राम पर मौजूद बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से संबंधित सभी आपत्तिजनक पोस्ट, वीडियो और विज्ञापनों को बिना देरी हटाया जाए।सरकार का कहना है कि ऐसे कंटेंट का ऑनलाइन प्रसार बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सात दिनों के भीतर मांगा जवाब
केंद्र सरकार ने Meta से नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर विस्तृत जवाब देने को कहा है। कंपनी से यह भी पूछा गया है कि भविष्य में इस तरह की सामग्री को रोकने के लिए वह कौन-कौन से तकनीकी और नीतिगत कदम उठा रही है।साथ ही कंटेंट मॉडरेशन और सुरक्षा तंत्र को लेकर विस्तृत जानकारी भी मांगी गई है।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर सरकार का फोकस
सरकार लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठा रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अवैध और हानिकारक सामग्री के खिलाफ निगरानी बढ़ाई जा रही है।अधिकारियों का कहना है कि इंटरनेट को सुरक्षित बनाना और बच्चों को ऑनलाइन शोषण से बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सोशल मीडिया कंपनियों की बढ़ेगी जवाबदेही
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में काम करने वाले सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को देश के कानूनों और आईटी नियमों का पालन करना होगा।
यदि किसी प्लेटफॉर्म पर अवैध या आपत्तिजनक सामग्री पाई जाती है, तो संबंधित कंपनियों को उसकी जिम्मेदारी तय करनी होगी और समय पर कार्रवाई करनी होगी।
डिजिटल सुरक्षा को लेकर सख्त संदेश
Meta को भेजा गया यह नोटिस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर सरकार के कड़े रुख को दर्शाता है। आने वाले समय में ऑनलाइन सुरक्षा मानकों को और मजबूत बनाने के लिए ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी।विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों से जुड़े संवेदनशील मामलों में सोशल मीडिया कंपनियों, सरकार और उपयोगकर्ताओं—तीनों की जिम्मेदारी समान रूप से महत्वपूर्ण है।







