डिजिटल अरेस्ट से लेकर फेक सिम रैकेट तक: बढ़ते साइबर फ्रॉड ने बढ़ाई चिंताभारत में डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। हाल के महीनों में डिजिटल अरेस्ट, पार्ट-टाइम जॉब फ्रॉड, ऑनलाइन ट्रेडिंग स्कैम और फेक सिम कार्ड रैकेट जैसे मामलों ने आम नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। इन साइबर ठगी के मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार, विभिन्न राज्य पुलिस विभाग और साइबर सुरक्षा एजेंसियां लगातार लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चला रही हैं। डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड: डर पैदा कर ठगे जा रहे लाखों रुपये साइबर अपराधी खुद को पुलिस, CBI, ED, कस्टम या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं। इसके बाद वे दावा करते हैं कि पीड़ित के नाम पर कोई अवैध पार्सल या वित्तीय अपराध दर्ज हुआ है और उसे "डिजिटल अरेस्ट" कर लिया गया है। मानसिक दबाव और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पीड़ित से लाखों रुपये ट्रांसफर करवाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर पूछताछ कर धनराशि जमा कराने का निर्देश नहीं देती। ऐसे कॉल आने पर घबराने के बजाय संबंधित विभाग या स्थानीय पुलिस से पुष्टि करना सबसे सुरक्षित तरीका है। पार्ट-टाइम जॉब और ऑनलाइन ट्रेडिंग स्कैम में फंस रहे युवा व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर घर बैठे कमाई, यूट्यूब वीडियो लाइक करने, होटल रेटिंग देने या विदेशी मुद्रा (Forex) ट्रेडिंग से भारी मुनाफा कमाने जैसे आकर्षक ऑफर देकर लोगों को जाल में फंसाया जा रहा है। शुरुआत में छोटी रकम देकर विश्वास जीतने के बाद बड़ी राशि निवेश करवाकर ठगी की जाती है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी निवेश या नौकरी के प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले संबंधित कंपनी की वैधता की जांच अवश्य करें। "गारंटीड रिटर्न" या "100% मुनाफा" का दावा करने वाली योजनाओं से हमेशा सतर्क रहें।