जयपुर के तीन छात्रों ने जीता द अर्थ प्राइज 2026: प्लास्टिक से दुनिया को मिला नया पर्यावरण समाधान

Myra Dubey
0 सेकंड पहलेSapne dekhne waale hi unhe poora karte hain.
राजस्थान के जयपुर के तीन 16 वर्षीय छात्रों ने दुनिया के प्रतिष्ठित पर्यावरण पुरस्कार द अर्थ प्राइज 2026 में ग्लोबल विजेता बनकर इतिहास रच दिया है। विवान छाछरिया, अरियाना अग्रवाल और अव्याना मेहता ने अपनी अनूठी खोज से अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की। तीनों छात्र जयश्री पेरीवाल इंटरनेशनल स्कूल, जयपुर के विद्यार्थी हैं। 29 मई 2026 को जिनेवा में आयोजित समारोह में उन्हें सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि भारत के लिए गौरव का क्षण मानी जा रही है। तीनों छात्रों की सफलता की देशभर में सराहना हो रही है।
इमली के बीजों से बना प्लास स्टिक
छात्रों ने प्लास स्टिक (Plas Stick) नाम का एक विशेष पाउडर विकसित किया है। यह पाउडर इमली के बेकार बीजों से तैयार किया गया है। पानी में मौजूद खतरनाक माइक्रोप्लास्टिक कणों को यह आपस में जोड़कर बड़े गुच्छों में बदल देता है। इसके बाद इन कणों को आसानी से पानी से अलग किया जा सकता है। यह तकनीक कम लागत वाली और पर्यावरण अनुकूल मानी जा रही है। विशेषज्ञ इसे स्वच्छ जल की दिशा में महत्वपूर्ण नवाचार मान रहे हैं।
आईआईटी गुवाहाटी के सहयोग से तैयार हुआ प्रोजेक्ट
प्लास स्टिक परियोजना आईआईटी गुवाहाटी के सहयोग से विकसित की गई है। इस तकनीक का उद्देश्य जल स्रोतों में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण को कम करना है। टीम ने वैज्ञानिक शोध और परीक्षण के बाद इस समाधान को तैयार किया। इसकी उपयोगिता और प्रभावशीलता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। यह नवाचार पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे भविष्य में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
पहली भारतीय टीम बनी ग्लोबल विजेता
द अर्थ प्राइज 2026 में दुनिया के सात क्षेत्रीय फाइनलिस्टों के बीच हुए सार्वजनिक मतदान में करीब 23 हजार लोगों ने भाग लिया। इसी मतदान के आधार पर भारतीय टीम को ग्लोबल विजेता चुना गया। यह पुरस्कार जीतने वाली यह पहली भारतीय टीम बन गई है। इस उपलब्धि ने भारत के युवा वैज्ञानिकों और नवाचार को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई है। छात्रों की सफलता की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है। यह देश के लिए गर्व की उपलब्धि है।
हजारों छात्रों तक पहुंचा नवाचार
प्लास स्टिक परियोजना के माध्यम से अब तक 8 हजार से अधिक छात्र और शिक्षक जुड़ चुके हैं। इस पहल के जरिए जल प्रदूषण और माइक्रोप्लास्टिक के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई जा रही है। छात्रों का उद्देश्य इस तकनीक को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है। पर्यावरण संरक्षण के लिए यह पहल युवाओं को प्रेरित कर रही है। कई शिक्षण संस्थानों ने भी इस नवाचार की सराहना की है। भविष्य में इसे व्यापक स्तर पर लागू करने की योजना है।
युवाओं की सोच बनी दुनिया के लिए प्रेरणा
विवान, अरियाना और अव्याना की सफलता ने साबित किया है कि युवा नवाचार वैश्विक समस्याओं का समाधान दे सकते हैं। पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ जल जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए उनकी सोच को दुनिया ने सराहा है। यह उपलब्धि भारतीय युवाओं की प्रतिभा और वैज्ञानिक सोच का प्रमाण है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नवाचार भविष्य की बड़ी चुनौतियों का समाधान बन सकते हैं। यह सफलता देश के लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। भारत का युवा अब वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।




