रामरक्षा आंदोलन' पर फडणवीस-उद्धव आमने-सामने: राम के नाम पर महाराष्ट्र में सियासी संग्राम

Arjun Singh
0 सेकंड पहलेSarkar ko iske baare mein kuch karna chahiye!
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे के 'रामरक्षा आंदोलन' पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि आखिरकार उद्धव ठाकरे को भगवान राम की याद आ गई। उन्होंने कहा कि राम का मार्ग छोड़ने की वजह से उनकी पार्टी कमजोर हुई और अब यदि वे राम के रास्ते पर चलेंगे तो उनका ही भला होगा।
रोज 'रामरक्षा स्तोत्र' पढ़ने की दी सलाह
फडणवीस ने सार्वजनिक मंच से उद्धव ठाकरे को सलाह दी कि वे केवल एक दिन के आंदोलन तक सीमित न रहें, बल्कि प्रतिदिन 'रामरक्षा स्तोत्र' का पाठ करें। उन्होंने कहा कि भगवान राम का नाम राजनीति के लिए नहीं बल्कि आस्था और जीवन मूल्यों के लिए लिया जाना चाहिए। इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया।
हनुमान मंदिर से उद्धव ने शुरू किया आंदोलन
उद्धव ठाकरे ने मुंबई के दादर स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिर से 'रामरक्षा आंदोलन' की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर निशाना साधते हुए कहा कि भगवान राम किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, उनके योगदान और न्यायिक प्रक्रिया का परिणाम है।
'बीजेपी-मुक्त राम' का दिया नारा
आंदोलन के दौरान उद्धव ठाकरे ने 'बीजेपी-मुक्त राम' का नारा देते हुए कहा कि भगवान राम को राजनीतिक प्रचार का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि राम पूरे देश की आस्था के प्रतीक हैं और किसी एक दल को उन पर राजनीतिक अधिकार जताने का हक नहीं है। इस बयान के बाद भाजपा नेताओं ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी।
राम मंदिर चढ़ावे में गड़बड़ी के लगाए आरोप
उद्धव ठाकरे ने अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों के इस्तीफे और जांच का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी और दान के उपयोग में अनियमितताओं की जांच होनी चाहिए। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं और जांच प्रक्रिया अपनी जगह जारी है।
हिंदुत्व की बहस पर तेज हुई सियासत
फडणवीस के बयान का जवाब देते हुए शिवसेना (UBT) नेताओं ने कहा कि उन्हें भाजपा से हिंदुत्व सीखने की जरूरत नहीं है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनका हिंदुत्व विचार और आस्था पर आधारित है, जबकि भाजपा हिंदुत्व का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए करती है। दोनों पक्षों के बयानों के बाद महाराष्ट्र में राम और हिंदुत्व को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।








