पद्म भूषण के बाद अलका का भावुक खुलासा: दो साल से दुर्लभ सुनने की बीमारी से जूझ रहीं मशहूर गायिका

Nisha Shah
0 सेकंड पहलेItna bada announcement! Fans bahut excited honge.
Dev Kapoor
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देश की प्रसिद्ध पार्श्व गायिका अलका याग्निक को हाल ही में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। इस सम्मान के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए अपनी स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्या का खुलासा किया। अलका ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से एक दुर्लभ बीमारी ‘सेंसरीन्यूरल नर्व हियरिंग लॉस’ (Sensorineural Hearing Loss) से जूझ रही हैं, जिसने उनकी सुनने की क्षमता को प्रभावित किया है।
दो साल तक लाइमलाइट से दूर रहीं अलका याग्निक
अलका याग्निक ने अपनी पोस्ट में लिखा कि वह पिछले दो वर्षों से सार्वजनिक कार्यक्रमों और मीडिया की नजरों से दूर थीं। उन्होंने बताया कि इस कठिन दौर में प्रशंसकों, दोस्तों और शुभचिंतकों का प्यार, दुआएं और समर्थन उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बना। गायिका ने कहा कि अब वह धीरे-धीरे सामान्य जीवन और अपने पेशेवर सफर की ओर लौट रही हैं।
पद्म भूषण सम्मान को बताया हौसले का प्रतीक
पद्म भूषण मिलने पर अलका ने कहा कि यह सम्मान सिर्फ उनके संगीत सफर की उपलब्धि नहीं, बल्कि उम्मीद, साहस और संघर्ष की जीत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें आगे बढ़ने और फिर से सक्रिय होने की प्रेरणा देता है। अलका ने अपने सभी प्रशंसकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी दुआओं और प्यार ने उन्हें इस मुश्किल समय में संभाले रखा।
क्या है Sensorineural Hearing Loss?
सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस (SNHL) सुनने की क्षमता से जुड़ी एक गंभीर और अपेक्षाकृत दुर्लभ समस्या है। यह तब होती है जब कान के अंदरूनी हिस्से (कॉक्लिया) या कान से मस्तिष्क तक ध्वनि पहुंचाने वाली नसों को नुकसान पहुंचता है। इस स्थिति में व्यक्ति को आवाजें सुनने, बातचीत समझने और ध्वनियों को स्पष्ट रूप से पहचानने में कठिनाई होने लगती है।
वायरल अटैक के बाद हुई थी बीमारी की शुरुआत
अलका याग्निक ने वर्ष 2024 में पहली बार इस बीमारी के बारे में जानकारी देते हुए बताया था कि फ्लाइट से उतरने के बाद उन्हें अचानक सुनाई देना बंद हो गया था। डॉक्टरों ने जांच के बाद इसे वायरल अटैक से जुड़ा Sensorineural Hearing Loss बताया। तभी से वह उपचार और रिकवरी की प्रक्रिया से गुजर रही हैं।
बीमारी के प्रमुख कारण और लक्षण
विशेषज्ञों के अनुसार इस बीमारी के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें वायरल संक्रमण, तेज आवाज के संपर्क में रहना, सिर में चोट, ऑटोइम्यून रोग, उम्र बढ़ना और कुछ विशेष दवाओं के दुष्प्रभाव शामिल हैं।
इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:
- सुनने की क्षमता कम होना,
- बातचीत समझने में परेशानी,
- कानों में लगातार घंटी बजना (टिनिटस),
- तेज या ऊंची पिच की आवाजें न सुन पाना,
- संतुलन बनाए रखने में कठिनाई,
फैंस को दी थी खास सलाह
अलका याग्निक ने अपने प्रशंसकों, खासकर युवाओं से अपील की थी कि वे अत्यधिक तेज आवाज में संगीत सुनने से बचें और हेडफोन का इस्तेमाल सावधानी से करें। उन्होंने कहा कि संगीत जगत से जुड़े लोगों को भी स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
अब भी जारी है रिकवरी का सफर
हालांकि अलका याग्निक की हालत में पहले से सुधार हुआ है, लेकिन वह अभी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हुई हैं। उन्होंने हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया था कि बीमारी के कारण अभी भी नियमित रूप से रिकॉर्डिंग और पेशेवर कार्य करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
भारतीय संगीत जगत की अमूल्य आवाज
अलका याग्निक ने बॉलीवुड को कई सदाबहार गीत दिए हैं। "तू शायर है मैं तेरी शायरी", "चुरा के दिल मेरा", "चांद छुपा बादल में", "गली में आज चांद निकला", "अगर तुम साथ हो" और "आए हो मेरी जिंदगी में" जैसे गीत आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में बसे हुए हैं। उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया है।






