शहडोल में विश्व आदिवासी दिवस का भव्य आयोजन: आदिवासी एकता और संस्कृति का दिखा सुंदर संगम

आदिवासी एकता और संस्कृति का दिखा सुंदर संगम
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Bimal Baiga

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जय सेवा जय जोहार जय आदिवासी

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शहडोल में गूंजा आदिवासी एकता का संदेश, विश्व आदिवासी दिवस बना सामाजिक गौरव का उत्सव

 

शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर एक ऐसा सुंदर और यादगार कार्यक्रम देखने को मिला, जिसने आदिवासी समाज की एकता, संस्कृति और भाईचारे की खूबसूरत तस्वीर सामने रखी। बैगा जनजाति समाज उत्थान संगठन एवं गोंडवाना स्टूडेंट यूनियन के संयुक्त सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में समाज के लोगों और युवाओं ने उत्साह के साथ सहभागिता निभाई।

 

कार्यक्रम में परंपरा, संस्कृति और सामाजिक एकजुटता का अद्भुत संगम देखने को मिला। एक मंच पर अलग-अलग संगठनों और समाज के लोगों का साथ आना यह संदेश दे गया कि जब समाज एकजुट होकर अपनी संस्कृति और अधिकारों के लिए आगे बढ़ता है, तो उसकी आवाज और मजबूत बनती है।

 

इस आयोजन की सबसे खास बात रही समाज के युवाओं और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी। सभी ने मिलकर कार्यक्रम को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाई। आयोजन ने न केवल विश्व आदिवासी दिवस की गरिमा बढ़ाई, बल्कि आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपरा और समाज के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दिया।

 

बैगा जनजाति समाज उत्थान संगठन के अध्यक्ष संजीव बैगा, उपाध्यक्ष कुवेंद्र बैगा, जिला अध्यक्ष राजकुमार बैगा एवं जिला उपाध्यक्ष शिवकुमार बैगा सहित संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता कार्यक्रम में सक्रिय रूप से मौजूद रहे।


कार्यक्रम को सफल बनाने में शंकर, गणेश, मालती, नीरज कुमार, योगेंद्र, कृष्णलाल, गुड्डा, पप्पू, शिवकुमार, कमल, विमल, संतोष, ददन, सूरज, निराला, रितेश कुमार, बसंत, दीपू एवं अनिमेष सहित सभी कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

 

 

 

कार्यक्रम को सफल बनाने में शंकर, गणेश, मालती, नीरज कुमार, योगेंद्र, कृष्णलाल, गुड्डा, पप्पू, शिवकुमार, कमल, विमल, संतोष, ददन, सूरज, निराला, रितेश कुमार, बसंत, दीपू एवं अनिमेष सहित सभी कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

 

शहडोल की धरती पर आयोजित यह कार्यक्रम सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि एकता, संस्कृति और सामाजिक सम्मान की ऐसी तस्वीर बनकर सामने आया, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। आयोजन ने साबित किया कि समाज की ताकत उसकी एकजुटता में होती है और जब युवा अपनी संस्कृति से जुड़कर आगे बढ़ते हैं, तो भविष्य की राह और भी मजबूत होती है।

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