केदारनाथ मंदिर दान विवाद: क्या श्रद्धालुओं की आस्था का पैसा VIP मेहमाननवाजी पर हुआ खर्च?
Dev Kapoor
0 सेकंड पहलेYeh haalat bahut chintajanak hai, jaldi karyawahi ho.
उत्तराखंड के प्रसिद्ध केदारनाथ धाम से जुड़ा एक नया विवाद इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत सामने आए कुछ दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में दिए गए दान का उपयोग कथित रूप से मंत्रियों, विधायकों और अन्य VIP मेहमानों की यात्रा, आवास और आतिथ्य संबंधी सुविधाओं पर किया गया। इन दावों के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है और मंदिर फंड की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
RTI दस्तावेजों में क्या दावा किया गया है?
RTI कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता विकेश नेगी द्वारा मांगी गई जानकारी के आधार पर दावा किया गया है कि बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के रिकॉर्ड में कुछ राजनीतिक व्यक्तियों और उनके परिजनों के नाम पर खर्च दर्ज हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इनमें भोजन, आवास और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े बिल शामिल बताए जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में VIP सुविधाओं पर हजारों रुपये खर्च किए गए, जिससे यह सवाल खड़ा हुआ कि क्या मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के दान का उपयोग इस उद्देश्य के लिए किया गया।
नेताओं ने आरोपों को किया खारिज
जिन नेताओं और जनप्रतिनिधियों के नाम कथित तौर पर दस्तावेजों में सामने आए हैं, उन्होंने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने केदारनाथ यात्रा और दर्शन अपने निजी खर्च पर किए थे तथा BKTC से किसी प्रकार की विशेष सुविधा नहीं ली गई। नेताओं का यह भी कहना है कि यदि उनके नाम पर कोई बिल या खर्च दर्ज किया गया है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
विपक्ष ने सरकार और BKTC को घेरा
मामले के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार और मंदिर समिति पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि श्रद्धालुओं के दान का उपयोग राजनीतिक व्यक्तियों की सुविधाओं के लिए किया गया है तो यह आस्था के साथ अन्याय होगा। विपक्ष ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यदि कोई वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
BKTC ने दिए जांच के संकेत
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा है कि मामला उनके संज्ञान में आया है और संबंधित फाइलों तथा दस्तावेजों की जांच की जा रही है। समिति का कहना है कि यदि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता, फर्जीवाड़ा या रिकॉर्ड में गड़बड़ी पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी संस्था होने के कारण पारदर्शिता उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
पहले भी विवादों में रह चुकी है BKTC
यह पहला अवसर नहीं है जब BKTC विवादों में आई हो। इससे पहले केदारनाथ में दान के लिए लगाए गए QR कोड, मंदिर गर्भगृह में सोने की परत संबंधी विवाद, चारधाम यात्रा के दौरान रील बनाने की घटनाएं और नियुक्तियों में कथित भाई-भतीजावाद जैसे मुद्दे भी चर्चा में रहे हैं। इन विवादों ने समय-समय पर मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
सबसे बड़ा सवाल अब भी बरकरार
इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है कि यदि संबंधित नेताओं और VIP मेहमानों ने अपने निजी खर्च पर यात्रा की थी, तो उनके नाम पर खर्च दर्शाने वाले दस्तावेज और रिकॉर्ड किस आधार पर तैयार किए गए। फिलहाल मामले की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन इस विवाद ने मंदिर फंड की पारदर्शिता और जवाबदेही पर नई बहस जरूर छेड़ दी है।






