उपभोक्ता फोरम ने कार कंपनी को दिया बड़ा झटका: नई कार या ₹20.5 लाख लौटाने का आदेश

नई कार या ₹20.5 लाख लौटाने का आदेश
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Sonu rai

Sonu rai

0 सेकंड पहले

Samaj ke liye is khabar ka bahut mahatva hai.

Krishna Yadav

Krishna Yadav

0 सेकंड पहले

Community ko mil ke aage aana hoga is mudde par.

Aditya Verma

Aditya Verma

0 सेकंड पहले

Aam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.

Myra Dubey

Myra Dubey

0 सेकंड पहले

Jab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.

Vaishali shinde

Vaishali shinde

0 सेकंड पहले

Yeh haalat bahut chintajanak hai, jaldi karyawahi ho.

Neel Saxena

Neel Saxena

0 सेकंड पहले

Hum is cause ke saath hain!

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यह मामला रायपुर के किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेमराज देबता से जुड़ा है। उन्होंने जून 2024 में मारुति सुजुकी की ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कार खरीदी थी। कुछ ही महीनों बाद वाहन के डैशबोर्ड पर इंजन मालफंक्शन का अलर्ट आने लगा और कार बार-बार बंद होने लगी। जांच में यह भी सामने आया कि ग्राहक को दिसंबर 2023 मॉडल बताकर जनवरी 2023 में निर्मित वाहन बेचा गया था।


सर्विस सेंटर ने वारंटी से किया इनकार, थमाया ₹5.30 लाख का बिल
कार में आई खराबी के बाद ग्राहक जब अधिकृत सर्विस सेंटर पहुंचे तो इंजन को वारंटी के दायरे से बाहर बताते हुए करीब ₹5.30 लाख का मरम्मत खर्च बताया गया। कंपनी की ओर से इंजन खराब होने की वजह ईंधन की गुणवत्ता और कथित फ्यूल कंटैमिनेशन को बताया गया, जबकि उपभोक्ता ने इसे वाहन की तकनीकी खामी और गलत जानकारी देकर वाहन बेचने का मामला बताया।


उपभोक्ता आयोग ने सुनाया सख्त फैसला
आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीज की पीठ ने कंपनी और डीलर की दलीलों को खारिज करते हुए आदेश दिया कि 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को नई E20-अनुकूल कार दी जाए। यदि ऐसा संभव नहीं हो तो वाहन की कीमत, आरटीओ शुल्क और बीमा सहित ₹20,50,494 लौटाए जाएं। निर्धारित समय के बाद भुगतान होने पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

 

मानसिक प्रताड़ना पर भी मिला मुआवजा
उपभोक्ता आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता को अनावश्यक मानसिक तनाव और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इसी आधार पर आयोग ने कंपनी पर ₹1 लाख मानसिक प्रताड़ना के मुआवजे तथा ₹10,000 अदालती खर्च के भुगतान का भी आदेश दिया। आयोग ने कहा कि जब देश के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर E20 ईंधन उपलब्ध है तो उपभोक्ता को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।


कंपनी करेगी अपील, सरकार ने किया E20 का बचाव
मारुति सुजुकी ने फैसले पर असहमति जताते हुए कहा है कि वाहन के फ्यूल टैंक से लिए गए नमूनों में ईंधन की मिलावट के संकेत मिले थे और कंपनी इस आदेश को ऊपरी अदालत में चुनौती देगी। दूसरी ओर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दोहराया कि E20 ईंधन से वाहनों के खराब होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है और उपभोक्ताओं के लिए अन्य ईंधन विकल्प भी मौजूद हैं।


ऑटो उद्योग और उपभोक्ताओं के लिए अहम मिसाल
रायपुर उपभोक्ता आयोग का यह फैसला E20 ईंधन, वाहन अनुकूलता और उपभोक्ता अधिकारों को लेकर देशभर में नई बहस का कारण बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वाहन निर्माताओं पर ईंधन मानकों के अनुरूप वाहन उपलब्ध कराने और ग्राहकों को पूरी व सही जानकारी देने का दबाव बढ़ेगा। वहीं, यह निर्णय भविष्य में इसी प्रकार के उपभोक्ता मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी संदर्भ भी बन सकता है।

 

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Sonu rai

Sonu rai

0 सेकंड पहले

Samaj ke liye is khabar ka bahut mahatva hai.

Krishna Yadav

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Community ko mil ke aage aana hoga is mudde par.

Aditya Verma

Aditya Verma

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Aam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.

Myra Dubey

Myra Dubey

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Jab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.

Vaishali shinde

Vaishali shinde

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Yeh haalat bahut chintajanak hai, jaldi karyawahi ho.

Neel Saxena

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0 सेकंड पहले

Hum is cause ke saath hain!

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