NEET विवाद पर सोनम वांगचुक का अनशन 19वें दिन: जंतर-मंतर से 20 जुलाई 'संसद मार्च' का आह्वान

जंतर-मंतर से 20 जुलाई 'संसद मार्च' का आह्वान
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Aarav Sharma

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0 सेकंड पहले

Community ko mil ke aage aana hoga is mudde par.

Anika Rajput

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0 सेकंड पहले

Aise logon ko support karna humara farz hai.

Vaishali shinde

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0 सेकंड पहले

Aam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.

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प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का जंतर-मंतर पर चल रहा अनशन गुरुवार को 19वें दिन में प्रवेश कर गया। वे NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में भूख हड़ताल कर रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार लगातार उपवास के कारण उनका वजन काफी कम हो गया है तथा रक्तचाप और शुगर स्तर भी चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्वास्थ्य निगरानी कर रही है।


NEET जांच और शिक्षा सुधार आंदोलन का मुख्य मुद्दा
वांगचुक और प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांग है कि NEET-UG 2026 में कथित धांधली की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसके साथ ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार करने तथा नैतिक जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठाई जा रही है। आंदोलन का केंद्र छात्रों के भविष्य और परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने पर है।


जंतर-मंतर पर सामूहिक उपवास, देशभर से समर्थन
16 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों, शिक्षकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने एक दिवसीय सामूहिक भूख हड़ताल का आयोजन किया। कई राज्यों से छात्र संगठनों और नागरिक समूहों ने भी आंदोलन के समर्थन में कार्यक्रम आयोजित किए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के लिए आवश्यक है।

 

20 जुलाई को 'संसद चलो' मार्च का आह्वान
सोनम वांगचुक ने अपने समर्थकों से 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 'संसद चलो' मार्च में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से कदम उठाने चाहिए। संगठन का दावा है कि देशभर से छात्र, अभिभावक और सामाजिक संगठन इस मार्च में भाग लेने की तैयारी कर रहे हैं।


विपक्षी दलों का समर्थन, राजनीतिक बहस तेज
आंदोलन को लेकर कई विपक्षी दलों ने समर्थन व्यक्त किया है। समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और शिवसेना (UBT) सहित कई दलों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों की मांगों पर सरकार से जवाब देने की मांग की है। वहीं सरकार की ओर से अब तक विभिन्न स्तरों पर परीक्षा प्रक्रिया और सुधारों को लेकर अपनी स्थिति रखी जाती रही है। इस मुद्दे पर संसद के आगामी मानसून सत्र में भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।


स्वास्थ्य और आंदोलन, दोनों पर देश की नजर
लगातार 19 दिनों से चल रहे अनशन के कारण सोनम वांगचुक की सेहत सबसे बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। दूसरी ओर, आंदोलन ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा पारदर्शिता और छात्रों के अधिकारों पर राष्ट्रीय बहस को और तेज कर दिया है। अब सभी की नजर सरकार की संभावित प्रतिक्रिया, न्यायिक प्रक्रिया और 20 जुलाई को प्रस्तावित 'संसद चलो' मार्च पर टिकी हुई है, जो इस आंदोलन की अगली महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

 

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