जंतर-मंतर पर तीसरे दिन भी छात्रों का आंदोलन जारी: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और पेपर लीक पर कार्रवाई की मांग तेज
Aryan Malhotra
0 सेकंड पहलेYeh samajik mudda bahut gambhir hai, dhyan dena zaroori hai.
Vivaan Gupta
0 सेकंड पहलेCommunity ko mil ke aage aana hoga is mudde par.
Myra Dubey
0 सेकंड पहलेCommunity ko mil ke aage aana hoga is mudde par.
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक मामलों पर सख्त कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों का उत्साह रातभर बना रहा और आधी रात के बाद भी धरना स्थल पर बड़ी संख्या में छात्र, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
वायरल तस्वीरों और वीडियो में प्रदर्शनकारी हाथों में तिरंगा लेकर देशभक्ति गीत गाते, नारे लगाते और डफली की थाप पर एकजुटता का संदेश देते दिखाई दिए। मोबाइल फोन की रोशनी से जगमगाता जंतर-मंतर लोकतांत्रिक विरोध की एक अनूठी तस्वीर पेश करता नजर आया।
पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ मुखर हुए छात्र
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बैनर तले आयोजित इस आंदोलन में शामिल युवाओं का कहना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने छात्रों का भविष्य संकट में डाल दिया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि लाखों छात्र वर्षों की मेहनत करते हैं, लेकिन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी और कथित भ्रष्टाचार के कारण उनकी मेहनत प्रभावित होती है।
धरना स्थल से वक्ताओं ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, दोषियों पर कार्रवाई और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग उठाई। आंदोलनकारियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
रातभर चला धरना, मंच से होते रहे भाषण और चर्चा
शनिवार शाम निर्धारित अनुमति अवधि समाप्त होने के बाद भी कई प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर डटे रहे। रातभर भाषण, चर्चा, नारेबाजी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला चलता रहा। कई लोगों ने तिरपाल और चादरों पर बैठकर रात बिताई, जबकि युवा समूहों में आंदोलन की आगामी रणनीति पर चर्चा करते दिखाई दिए।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दीपके ने किसानों और अन्य सामाजिक संगठनों से भी समर्थन की अपील करते हुए कहा कि यह केवल छात्रों का नहीं बल्कि व्यवस्था सुधार का व्यापक आंदोलन है।
सुबह हुई झालमुड़ी और क्रिकेट के साथ
रविवार सुबह धरना स्थल का दृश्य सामान्य राजनीतिक प्रदर्शनों से अलग नजर आया। कई प्रदर्शनकारी झालमुड़ी खाते दिखाई दिए, जबकि कुछ युवाओं ने धरना स्थल के एक हिस्से में क्रिकेट खेलकर लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
क्रिकेट मैच के दौरान बल्लेबाजों के अच्छे शॉट्स पर तालियां गूंजती रहीं। इसके अलावा गिटार, सामूहिक गायन और सांस्कृतिक गतिविधियों ने भी आंदोलन को जीवंत बनाए रखा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे संघर्ष के दौरान ऐसे कार्यक्रम ऊर्जा बनाए रखने में मदद करते हैं।
सुविधाएं रोके जाने के आरोप, पुलिस ने दी नियमों की याद दिलाई
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि रात के दौरान पानी, बिजली और शौचालय जैसी आवश्यक सुविधाओं में बाधाएं उत्पन्न हुईं, जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि इन आरोपों पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वहीं दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के लिए अनुमति शनिवार शाम 5 बजे तक ही दी गई थी और समय सीमा समाप्त होने के बाद धरना स्थल खाली करने के निर्देश दिए गए थे। पुलिस ने चेतावनी दी है कि अनुमति की शर्तों का उल्लंघन होने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
स्वयंसेवकों ने संभाली आंदोलन की जिम्मेदारी
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में स्वयंसेवक भी सक्रिय रहे, जिन्होंने प्रदर्शनकारियों के लिए चाय, नाश्ता और पेयजल की व्यवस्था की। आयोजकों ने इन स्वयंसेवकों को आंदोलन की रीढ़ बताते हुए उनकी भूमिका की सराहना की। अभिजीत दीपके ने कहा कि किसी भी जन आंदोलन की सफलता केवल मंचीय भाषणों से नहीं, बल्कि उन लोगों की मेहनत से तय होती है जो पर्दे के पीछे रहकर व्यवस्था संभालते हैं।
आज निकलेगा ‘इंडिया अगेंस्ट पेपर लीक’ कैंडल मार्च
आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाने के उद्देश्य से सोमवार शाम 6 बजे ‘India Against Paper Leak’ कैंडल मार्च आयोजित करने की घोषणा की गई है। आयोजकों का दावा है कि इस मार्च में छात्र, अभिभावक और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी प्रमुख मांगों में पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही तय करना शामिल है।
आगे क्या?
जंतर-मंतर पर जारी यह आंदोलन अब केवल एक परीक्षा या एक मुद्दे तक सीमित नहीं रह गया है। यह देशभर के उन छात्रों की आवाज के रूप में उभर रहा है जो परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजर सरकार और प्रशासन की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।






