चिता की राख में मिली ‘सर्जिकल कैंची’: स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

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मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे स्वास्थ्य विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। भैरूंदा तहसील के सिंहपुर गांव की एक महिला की नसबंदी ऑपरेशन के बाद मौत हो गई। मामला तब और गंभीर हो गया जब अंतिम संस्कार के बाद उसकी चिता की राख में एक जली हुई सर्जिकल कैंची मिली।
12 जनवरी को हुआ था सरकारी अस्पताल में ऑपरेशन
जानकारी के अनुसार, मृतक महिला शिवानी बारेला का 12 जनवरी को भैरूंदा स्थित शासकीय सिविल अस्पताल में नसबंदी ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन के बाद महिला को उसी दिन घर भेज दिया गया। लेकिन अगले ही दिन उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी।
बिगड़ती हालत के बाद भोपाल किया गया रेफर
परिजन महिला को पहले सीहोर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से उसकी गंभीर हालत को देखते हुए भोपाल के हमीदिया अस्पताल रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई, जिससे परिजनों में आक्रोश फैल गया।
अस्थि संचय के दौरान राख में मिली सर्जिकल कैंची
मामले ने नया मोड़ तब लिया जब अंतिम संस्कार के बाद अस्थि संचय के दौरान परिजनों को महिला की राख से एक जली हुई सर्जिकल कैंची मिली। इसके बाद परिजनों ने आरोप लगाया कि नसबंदी ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों की भारी लापरवाही के चलते कैंची महिला के पेट में ही छोड़ दी गई थी, जिससे संक्रमण फैला और उसकी मौत हो गई।
परिजनों का आरोप, कार्रवाई की मांग
परिजनों का कहना है कि महिला लगातार पेट दर्द की शिकायत कर रही थी, लेकिन उसे गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने दोषी डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप, डॉक्टर का तबादला
मामला तूल पकड़ता देख स्वास्थ्य विभाग ने नसबंदी ऑपरेशन करने वाली महिला डॉक्टर का तत्काल तबादला कर दिया है। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
बीएमओ का बयान, जांच जारी
भैरूंदा के बीएमओ डॉ. प्रफुल्ल कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि नसबंदी ऑपरेशन में आमतौर पर सर्जिकल कैंची का इस्तेमाल नहीं होता। उन्होंने कहा कि कैंची कहां से आई और मौत की असली वजह क्या है, यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी और विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी। यह मामला सरकारी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता, जवाबदेही और मरीजों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।





