Delhi Chennai Expressway: दिल्ली से चेन्नई तक 2200 KM का एक्सप्रेसवे

Kabir Shukla
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Tanya Bajaj
0 सेकंड पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Ishaan Tiwari
0 सेकंड पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Kavya Mishra
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Shruti Bajpai
1 घंटे पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Myra Dubey
1 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
दिल्ली से चेन्नई तक 2200 किलोमीटर का रूट
देश में एक्सप्रेसवे और हाईवे नेटवर्क को लगातार विस्तार दिया जा रहा है। इसी कड़ी में दिल्ली से चेन्नई तक करीब 2,200 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे कॉरिडोर को जोड़ने की योजना चर्चा में है। यह रूट दिल्ली से शुरू होकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से होकर चेन्नई तक पहुंचेगा। प्रस्तावित कनेक्टिविटी में यमुना एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी और दक्षिण भारत की ओर जाने वाले एक्सप्रेसवे कॉरिडोर को जोड़ने की बात कही गई है।
7 राज्यों से होकर गुजरेगा सफर
इस रूट से दिल्ली से चेन्नई तक जाने के दौरान कुल सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली से होकर गुजरने की बात कही गई है। इसमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु शामिल हैं। इस कनेक्टिविटी का उद्देश्य उत्तर भारत को दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों से तेज सड़क नेटवर्क के जरिए जोड़ना है। रिपोर्ट के मुताबिक, बुंदेलखंड के रास्ते जाने वाला यह विकल्प दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे वाले रूट की तुलना में दूरी कम करने में मदद कर सकता है।
यमुना एक्सप्रेसवे से शुरू होगा सफर
दिल्ली से आगे जाने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे प्रमुख कड़ी के रूप में काम करेगा। करीब 165 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे दिल्ली और नोएडा को आगरा से जोड़ता है तथा जेवर, अलीगढ़ और मथुरा के रास्ते आगरा तक पहुंचता है। इसके बाद आगरा-ग्वालियर क्षेत्र की कनेक्टिविटी से होते हुए मध्य प्रदेश की ओर बढ़ा जा सकेगा। आगे बुंदेलखंड क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी इस लंबे कॉरिडोर को दक्षिण की ओर ले जाने में मदद करेगी।
बुंदेलखंड से नागपुर तक कनेक्टिविटी
आगरा और ग्वालियर के बाद रूट बुंदेलखंड क्षेत्र से होकर आगे बढ़ेगा। रिपोर्ट में झांसी, बबीना, सागर, लखनादौन और सिवनी जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है। यह नेटवर्क आगे नागपुर से जुड़ने के बाद महाराष्ट्र में प्रवेश करेगा। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 से जुड़ी सड़कें भी इस कनेक्टिविटी को मजबूत करती हैं और उत्तर भारत से मध्य भारत होते हुए दक्षिण भारत की ओर जाने वाले सड़क नेटवर्क में अहम भूमिका निभाती हैं।
नागपुर से हैदराबाद और फिर चेन्नई की ओर
नागपुर के बाद रूट महाराष्ट्र से तेलंगाना की ओर बढ़ेगा और आदिलाबाद तथा निजामाबाद के रास्ते हैदराबाद तक पहुंचने की कनेक्टिविटी मिलेगी। इसके बाद हैदराबाद से अमरावती और आंध्र प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के रास्ते तमिलनाडु की ओर बढ़ने की योजना बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार यह कॉरिडोर नलगोंडा, गुंटूर, अमरावती, ओंगोल और नेल्लोर जैसे क्षेत्रों से होकर आगे बढ़ सकता है और अंत में नेशनल हाईवे-16 से जुड़कर चेन्नई तक पहुंचता है।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे भी है वैकल्पिक रूट
दिल्ली से चेन्नई जाने के लिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे वाला एक वैकल्पिक मार्ग भी मौजूद है। इस रूट में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के बाद मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और फिर पुणे-बेंगलुरु तथा चेन्नई की ओर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह विकल्प बुंदेलखंड वाले प्रस्तावित कॉरिडोर की तुलना में करीब 250 किलोमीटर ज्यादा लंबा पड़ सकता है। ऐसे में नया कनेक्टिविटी नेटवर्क दूरी, समय और ईंधन की खपत कम करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।








