Tech Layoffs : उबर में बड़ी छंटनी: 10% ग्लोबल वर्कफोर्स घटाने का फैसला

Aarav Sharma
7 घंटे पहलेFinancial planning sochni hogi ab naye sir se.
Nidhi kumari
7 घंटे पहलेEconomy par iska kya asar padega, sochne wali baat hai.
Ishaan Tiwari
10 घंटे पहलेMarket mein itna uthar-chadhaav, investors pareshan hain.
Aarav Sharma
12 घंटे पहलेMarket mein itna uthar-chadhaav, investors pareshan hain.
Aditya Verma
12 घंटे पहलेEconomy par iska kya asar padega, sochne wali baat hai.
Sneha Menon
15 घंटे पहलेRBI aur government ko milkar iska hal nikalna chahiye.
कैब सर्विस और टेक्नोलॉजी कंपनी उबर टेक्नोलॉजीज ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव की घोषणा की है। कंपनी वैश्विक स्तर पर अपने कर्मचारियों की संख्या करीब 10 प्रतिशत कम करने जा रही है। 31 दिसंबर 2025 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार उबर और उसकी सहयोगी कंपनियों में करीब 34,000 कर्मचारी थे। इस आधार पर लगभग 3,400 पद प्रभावित हो सकते हैं।
प्रबंधन की अतिरिक्त परतें होंगी कम
उबर के सीईओ दारा खोसरोशाही ने कर्मचारियों को भेजे ज्ञापन में कहा कि कंपनी प्रबंधन के स्तर कम कर रही है और टीमों की संरचना को सरल बनाया जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज करना और संगठन में बढ़ती जटिलता को कम करना है।
उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में उबर का राजस्व करीब तीन गुना हुआ है। इस विस्तार के साथ संगठन में प्रबंधन की कई अतिरिक्त परतें, अधिक समन्वय और जिम्मेदारियों का बंटवारा जैसी जटिलताएं भी बढ़ी हैं।
भारत में भी कुछ कर्मचारियों की जाएगी नौकरी
उबर इंडिया के प्रवक्ता के मुताबिक वैश्विक संगठनात्मक बदलावों का असर भारत पर भी पड़ेगा। भारत में उबर की कुछ महत्वपूर्ण टीमों के कर्मचारियों को विदाई देनी होगी। हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि भारत उसके लिए प्रमुख बाजार बना रहेगा और यहां यात्रियों तथा ड्राइवरों के लिए स्थानीय स्तर पर नवाचार जारी रहेगा। कंपनी भारत में अपने क्षेत्रीय संचालन को मजबूत करने और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में परिवहन कारोबार की रणनीतिक भूमिका बढ़ाने पर भी जोर दे रही है।
किन पदों पर सबसे ज्यादा असर?
छंटनी में मुख्य रूप से समन्वय और अतिरिक्त प्रबंधन से जुड़े पद प्रभावित हुए हैं। कंपनी ने प्रबंधन के स्तर कम किए हैं और कुछ छोटी टीमों के प्रबंधकों की जिम्मेदारियां बढ़ाई हैं।
उबर के अनुसार, सीईओ से सात या उससे अधिक स्तर नीचे काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या में करीब 20 प्रतिशत की कमी की गई है। वहीं, बेहद छोटी टीमों की संख्या लगभग 50 प्रतिशत घटाई गई है।
डिलीवरी और टेक टीमों का भी होगा पुनर्गठन
उबर अपने डिलीवरी कारोबार की अलग-अलग टीमों को भी एकीकृत कर रही है। रेस्तरां, रिटेल और डायरेक्ट डिलीवरी से जुड़ी टीमों को वैश्विक, क्षेत्रीय और देश स्तर पर एकल जिम्मेदारी वाली टीमों में संगठित किया जाएगा। इसके अलावा टेक्नोलॉजी विभाग में मुख्य सेवाओं से जुड़ी इंजीनियरिंग और साइंस टीमों को भी एक साथ लाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
वर्क फ्रॉम होम पर भी कंपनी का बड़ा फैसला
उबर अपने कर्मचारियों को कम संख्या वाले प्रमुख शहरों में केंद्रित करने की तैयारी में है। कंपनी के अनुसार वैश्विक टीमों को न्यूयॉर्क और सैन फ्रांसिस्को जैसे प्रमुख केंद्रों में रखा जाएगा। कंपनी अपने अधिकांश रिमोट कर्मचारियों को कार्यालय से काम करने के लिए कह रही है। हालांकि, मौजूदा हाइब्रिड वर्क पॉलिसी जारी रहेगी, जिसके तहत कर्मचारियों को सप्ताह में तीन दिन ऑफिस से काम करना होगा। आगे चलकर करीब एक प्रतिशत कर्मचारी ही पूरी तरह रिमोट रहेंगे।
ओरेकल की संभावित छंटनी से भी बढ़ी टेक सेक्टर की चिंता
इसी बीच टेक कंपनी ओरेकल को लेकर भी बड़ी छंटनी की खबरें सामने आई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कंपनी वैश्विक स्तर पर हजारों कर्मचारियों की संख्या घटाने पर विचार कर रही है। संभावित कटौती का कारण क्लाउड और AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते खर्च को संतुलित करना बताया जा रहा है। पिछले एक साल में ओरेकल के कर्मचारियों की संख्या में भी बड़ी कमी आई है। हालांकि, नई संभावित छंटनी के आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि कंपनी की ओर से नहीं की गई है।
AI और बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च का दबाव
ओरेकल AI से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर क्षमता पर भारी निवेश कर रही है। AI कंपनियों से बढ़ती मांग के बीच क्लाउड कारोबार को विस्तार देने के लिए खर्च बढ़ रहा है। ऐसे में कंपनी लागत कम करने और संगठन को नए सिरे से व्यवस्थित करने की दिशा में कदम उठा रही है।
टेक सेक्टर में बदलते बिजनेस मॉडल का संकेत
उबर और ओरेकल से जुड़ी छंटनी की खबरें ऐसे समय में सामने आ रही हैं, जब बड़ी टेक कंपनियां AI, ऑटोमेशन और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश कर रही हैं। कंपनियां एक तरफ नए तकनीकी क्षेत्रों में पूंजी लगा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ संगठनात्मक ढांचे को छोटा और अधिक कुशल बनाने पर जोर दे रही हैं।








