सोना चांदी में जोरदार तेजी: शेयर बाजार की सुस्ती के बीच सोने की चमक बढ़ी

Arjun Singh
2 घंटे पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Kavya Mishra
3 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Navya Nair
3 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Shruti Bajpai
8 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Ritika Ghosh
9 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Sai Mehta
10 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Kunal Rao
11 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Simran Arora
11 घंटे पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
घरेलू शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच सोने की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। निवेशक जोखिम वाले विकल्पों से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं। इसका सीधा फायदा सोने और चांदी जैसे कीमती धातुओं को मिल रहा है। अगस्त 2026 में सोने की कीमतों में करीब 13.5 से 15 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई है। घरेलू बाजार में 24 कैरेट सोने का भाव करीब 1.59 लाख से 1.63 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया है। तेजी के बीच निवेशकों की नजर अब सोने के अगले रुख पर बनी हुई है।
चांदी ने तेजी में सोने को भी पीछे छोड़ा
अगस्त महीने में चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले और तेज उछाल देखने को मिला है। इस दौरान चांदी के भाव में करीब 19 से 20 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई है। भारतीय बाजार में चांदी करीब 2.40 लाख से 2.45 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रही है। चांदी की कीमतों को निवेश मांग के साथ औद्योगिक मांग से भी समर्थन मिल रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में चांदी के इस्तेमाल से इसकी मांग मजबूत बनी हुई है। इसी वजह से चांदी इस समय निवेशकों के आकर्षण का बड़ा केंद्र बनी हुई है।
सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहे निवेशक
वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ने के साथ निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ा है। शेयर बाजार में कमजोरी और लगातार उतार-चढ़ाव के बीच सोने को पारंपरिक सुरक्षित विकल्प माना जाता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भी बाजार की चिंताओं को बढ़ाया है। ऐसे माहौल में निवेशक अपने पोर्टफोलियो में कीमती धातुओं की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। मांग बढ़ने का असर सोने और चांदी दोनों की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। बाजार में आगे भी वैश्विक घटनाक्रम के आधार पर कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
अमेरिकी फेड की नीति का भी असर
कीमती धातुओं की तेजी के पीछे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बनी अनिश्चितता भी एक बड़ा कारण है। ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं के बीच अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में कमजोरी का असर सोने पर पड़ा है। आमतौर पर डॉलर और यील्ड में गिरावट से सोने जैसी संपत्तियों को समर्थन मिलता है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार की गतिविधियों का असर घरेलू सर्राफा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। निवेशक अब फेड के अगले फैसलों और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं। इन संकेतों के आधार पर सोने और चांदी की दिशा आगे तय हो सकती है।
चांदी की औद्योगिक मांग बनी मजबूत
चांदी की तेजी सिर्फ निवेश मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी औद्योगिक मांग भी मजबूत बनी हुई है। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में चांदी का इस्तेमाल लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है। इसके अलावा एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक तकनीकी उपकरणों की बढ़ती मांग से भी चांदी की खपत को समर्थन मिल रहा है। सप्लाई और मांग के अंतर का असर भी इसकी कीमतों पर पड़ रहा है। यही वजह है कि अगस्त में चांदी ने सोने की तुलना में ज्यादा तेजी दिखाई है। बाजार विशेषज्ञ औद्योगिक मांग को चांदी के लिए लंबी अवधि का महत्वपूर्ण समर्थन मान रहे हैं।
निवेशकों के लिए खरीदारी पर क्या सलाह
मौजूदा ऊंचे स्तरों को देखते हुए बाजार विशेषज्ञों ने निवेशकों को जल्दबाजी में एकमुश्त बड़ा निवेश करने से बचने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक कीमतों में तेजी के बाद कुछ समय के लिए मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है। नए निवेशक गिरावट आने पर धीरे-धीरे निवेश करने की रणनीति अपना सकते हैं। वहीं पहले से निवेश कर चुके लोग अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार होल्ड या आंशिक मुनाफावसूली पर विचार कर सकते हैं। सोने और चांदी में निवेश करते समय कीमतों के साथ वैश्विक बाजार के संकेतों पर नजर रखना जरूरी है। फिलहाल दोनों कीमती धातुओं में तेजी का माहौल बना हुआ है, लेकिन आगे उतार-चढ़ाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।








